फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तात मीन आज कौरवों क काल बणी जाण...

विज्ञापन
विज्ञापन
कण्वाश्रम। कण्वाश्रम वसंतोत्सव का दूसरा दिन चक्रव्यूह उत्सव ग्रुप के नाम रहा। श्रीनगर गढ़वाल और केदारघाटी से आए लोक कलाकारों ने महाभारत युद्ध के 13वें दिन कौरवों द्वारा पांडवों के लिए रचे गए चक्रव्यूह का आकर्षक मंचन किया। तात मीन आज कौरवों क काल बणी जाण...पर खूब तालियां बजीं। गढ़वाली भाषा में हुए इस कार्यक्रम को कण्वाश्रम मेले में आए दर्शकों ने सराहा।
विज्ञापन

कार्यक्रम आयोजन स्थल पर रंग-बिरंगी साड़ियों के घेरे से बने चक्रव्यूह को देख लोग रोमांचित हो उठे। उत्सव ग्रुप की शानदार प्रस्तुति से पूरा पंडाल महाभारत के इस चक्रव्यूह में अर्जुन पुत्र अभिमन्यु के साथ हुए छलकपट पर रो पड़ा।
मंचन के प्रारंभ में गुरु द्रोणाचार्य चक्रव्यूह की रचना करते हैं। इस पर अर्जुन की अनुपस्थिति में कौरव पांडवों को चक्रव्यूह भेदने के लिए आमंत्रित करते हैं। अर्जुन की अनुपस्थिति में जहां युधिष्ठिर संकट में पड़ जाते हैं, वहीं पांडवों की ओर से अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु चक्रव्यूह भेदने के रणभूमि में जाने की जिद करते हैं। कहते हैं तात मीन आज कौरवों क काल बणी जाण...ताऊ युधिष्ठर से आज्ञा प्राप्त कर अभिमन्यु एक-एक कर छह द्वारों को भेदने के बाद जब वह सातवें द्वार पर पहुंचते हैं, तब कौरव दल में हाहाकार मचा होता है। अभिमन्यु को मारने के लिए कौरव छल का सहारा लेते हैं। शकुनी दुर्योधन को षड्यंत्र कर अभिमन्यु के अस्त्र-शस्त्र लेने को कहता है। दुर्योधन धोखे से अभिमन्यु से अस्त्र-शस्त्र ले लेता है। निहत्थे अभिमन्यु को कौरव घेर कर उसका निर्दयता के साथ वध कर देते हैं। अभिमन्यु की मौत से पांडवों में शोक की लहर छा जाती है। अर्जुन को जैसे ही उसकी छल से मौत की खबर लगती है, वह उसी समय अगले दिन सूर्यास्त से पहले जयद्रथ के वध की शपथ लेते हैं।
विज्ञापन

लोक कलाकार राकेश भट्ट और लखपत सिंह राणा की अगुवाई में हुए चक्रव्यूह मंचन में अंकित भट्ट, विवेक मेहरा, गणेश डिमरी, मुकेश नेगी, कैलाश ध्यानी, पवन जोशी, अजय पाल राणा, जीत सिंह, रणजीत सिंह, मदन राणा, पंकज नैथानी, शीशपाल रावत, हरीश पुरी समेत करीब साठ कलाकारों ने अपने अभिनय के दम पर दर्शकों को बांधे रखा।
विज्ञापन


-फोटो
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें