फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चार साल से कार्डियोलॉजिस्ट नहीं, हार्ट अटैक से मर रहे लोग

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
कोटद्वार। स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते कोटद्वार में लोगों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। कोटद्वार बेस अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ (कार्डियोलॉजिस्ट) की तैनाती नहीं होने का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। आलम यह है कि पिछले दो साल से एक दर्जन से अधिक लोग अस्पताल में इलाज के दौरान हार्टअटैक से मर चुके हैं। विभाग बेस अस्पताल में तैनात एक फिजीशियन पर हार्ट के रोगियों को देखने की जिम्मेदारी सौंपकर इलाज के नाम पर खानापूर्ति करते हुए लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रहा है।
वर्ष 1970 में कोटद्वार क्षेत्रवासियों की मांग पर कोटद्वार में संयुक्त अस्पताल का निर्माण किया गया था। पौड़ी जिले की 80 प्रतिशत आबादी कोटद्वार अस्पताल पर निर्भर होने के लिए इसे मार्च 2018 में बेस का दर्जा दिया गया। इसके तहत अस्पताल का बहुमंजिला भवन का निर्माण हुआ। डिजिटल एक्सरे, एमआरआई, सीटी स्कैन, लीथो ट्रिप्सी व अल्ट्रासाउंड आदि मशीनों को स्थापित किया गया, लेकिन वर्ष 2015 से आज तक हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं की गई। अस्पताल के आंकड़ों की बात करें तो पिछले चार सालों से करीब 27 लोग अस्पताल में हृदय रोग से मौत का शिकार हो चुके हैं। पिछले दो साल से करीब 12 लोगों की इलाज के दौरान हार्टअटैक से मौत हो चुकी है।
विज्ञापन


एक फिजीशियन पर हृदय रोग के मरीजों को देखने की जिम्मेेदारी
कोटद्वार। बेस अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डा. जीसी ध्यानी के पास ओपीडी का अधिक भार रहता है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ डाक्टर की तैनाती की अपेक्षा फिजीशियन को हृदय रोगियों को देखने की जिम्मेदारी सौंप रखी है। ऐसे में अधिक व्यस्तता के कारण वे हृदय रोग के मरीजों को नहीं देख पाते।

केस एक
शिवपुर निवासी अनुसूया प्रसाद ध्यानी बेस अस्पताल की इमरजेंसी में सीने में दर्द को लेकर गए थे, जहां पर डाक्टरों ने उनके हृदय रोग की जांच नहीं की और फिजीशियन को दिखाने के लिए भेज दिया। करीब एक घंटा फिजीशियन को दिखाने के लिए लाइन पर लगने के दौरान उन्हें हार्टअटैक पड़ा और उनकी मौत हो गई।

केस दो
पदमपुर सुखरो निवासी पूर्व सैनिक जगत सिंह रात इमरजेंसी में बुखार और सीने के दर्द को लेकर अपना इलाज कराने पहुंचे। इमरजेंसी में तैनात सर्जन ने उनका चेकअप किया। वह सीने की दर्द वाले हृदय रोग को पहचान नहीं सके और मरीज का सामान्य इलाज कर उसे वार्ड में भर्ती कर दिया। करीब एक घंटे बाद जगत सिंह की वार्ड में हार्टअटैक से मौत हो गई।
विज्ञापन


क्या कहते हैं अधिकारी
हृदय रोग विशेषज्ञ के मामले को सभी विभागीय बैठकों में उठा रहे हैं, लेकिन अस्पताल को कार्डियोलॉजिस्ट नहीं मिल पा रहा है। पीपीडी मोड में संचालित हो रहे प्रदेश के अन्य अस्पतालों में पूर्व में तैनात कार्डियोलॉजिस्ट को कोटद्वार ट्रांसफर की मांग की जाएगी।
-डा. आरएस चौहान, सीएमएस बेस अस्पताल कोटद्वार

-फोटो
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें