कोटद्वार। क्षेत्र के नागरिकों और अधिवक्ताओं ने भवनों की रजिस्ट्री में जिला विकास प्राधिकरण (डीडीए) की अनापत्ति के औचित्य पर सवाल उठाते हुए जिलाधिकारी पौड़ी को ज्ञापन भेजा । कहा कि अनापत्ति की प्रक्रिया डीडीए गठन के बाद बने भवनों की खरीद फरोख्त पर तो ठीक है, लेकिन डीडीए गठन से पूर्व नगर निगम में शामिल भाबर के गांवों के भवनों की खरीद-फरोख्त की रजिस्ट्री में इसका कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने डीडीए के आदेश में शिथिलता बरतने की मांग की।
सोमवार को क्षेत्र के लोगों और वकीलों ने एसडीएम के माध्यम से डीडीए अध्यक्ष/डीएम पौड़ी को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में कहा कि सचिव, डीडीए/अपर जिलाधिकारी पौड़ी के 30 अप्रैल 2019 के आदेश में भवनों के बयनामा रजिस्टर्ड करने से पूर्व डीडीए की अनापत्ति लेना अनिवार्य किया गया है। सब रजिस्ट्रार कार्यालय ने 4 मई से विक्रय पत्रों के पंजीकरण से इनकार किया जा रहा है। इन लोगों ने कहा कि क्षेत्रीय कार्यालय में व्यवस्था के तौर पर तैनात जेई व्यस्तताओं के चलते कम से कम एक सप्ताह का समय लगने की बात कह रहे हैं। जबकि क्षेत्रीय कार्यालय में स्थायी लिपिक तक की नियुक्ति नहीं है। पंजीकरण के लिए विक्रय पत्र स्वीकार न किए जाने से सरकार को राजस्व की हानि उठानी पड़ेगी। इस मौके पर प्राधिकरण और इसके क्षेत्रीय कार्यालयों में ढांचागत सुविधाएं जुटाने, तकनीकी, प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति करने के साथ ही भवनों के विक्रयपत्रों के पंजीकरण हेतु प्राधिकरण की अनापत्ति की बाध्यता में छूट प्रदान करने की मांग की गई।
ज्ञापन सौंपने वालों में अधिवक्ता जीतेंद्र सिंह चौहान, विजय नैथानी, प्रमोद राणा, मुकेश चंद्र कबटियाल, देवेंद्र कुमार, बृजमोहन नैथानी, विक्रम सिंह, सुनील चंद्र, पूजा, अनुज भट्ट, ललित पटवाल आदि शामिल रहे।