कोटद्वार। उड़ने दो मुझको आसमां को छूकर आऊंगी, क्यों डरते हो हैवानी दुनिया से, सबसे अकेले भीड़ जाऊंगी, मैं अपराजिता बन जाऊंगी, मैं अपराजिता बन जाऊंगी.. कहते हुए अमर उजाला के अपराजिता महाअभियान के अंतर्गत बाल अपराध और महिला सशक्तीकरण की गोष्ठी में शामिल 426 छात्र-छात्राओं और प्रतिभागियों ने नारी गरिमा की शपथ ली। गोष्ठी में बेटियों की शिक्षा, जागरूकता और महिला सशक्तीकरण पर जोर दिया गया।
शनिवार को जीजीआईसी कोटद्वार में अमर उजाला अपराजिता के तहत आयोजित बाल अपराध व महिला हिंसा से जागरूकता गोष्ठी में समाजसेवी गोविंद डंडरियाल ने कहा कि समाज बदल रहा है, लेकिन लोग आज भी बेटा और बेटियों में फर्क करना नहीं छोड़ रहे हैं। कुछ लोग तो बेटों को प्राइवेट और बेटियों को सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि बेटियों को आगे बढ़ना है तो उन्हें समाज की इस मानसिकता और रुढ़ियों से लड़ना होगा। साथ ही शिक्षा प्राप्त कर उच्च पदों पर आसीन होकर बेटी और बेटों में फर्क करने वाले समाज के लोगों को मुंहतोड़ जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम का उद्देश्य बेटियों को बाल अपराधों, महिला अपराधों के प्रति सजग और जागरूक करना है ताकि बेटियां अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सकें और निडर होकर शिक्षा प्राप्त कर सकें।
कोटद्वार के कोतवाल मनोज रतूड़ी ने कहा कि छात्राओं को असामाजिक तत्वों और अपराधी प्रवृत्ति के लोगों से सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेटियों को अक्सर इस बात का डर रहता है कि यदि अराजकतत्व द्वारा की गई छेड़छाड़ व अन्य परेशानी परिवार को बताई तो वे उनकी पढ़ाई छुड़वा देंगे। आज भी लोगों की सोच बेटियों के लिए संकीर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि कोई अराजक तत्व छेड़छाड़ करता है तो उसे छिपाएं नहीं, बल्कि अपने अभिभावकों और पुलिस को बताएं। पुलिस उनकी मदद करेगी। उन्होंने छात्राओं को कोतवाली कोटद्वार, पुलिस क्षेत्राधिकारी और एकल इमरजेंसी नंबर 112 नोट करवाया। अपराजिता कार्यक्रम में प्रधानाचार्य बृजेश रानी, एनएसएस के गढ़वाल मंडल प्रभारी पुष्कर सिंह नेगी, पुलिस उपनिरीक्षक पूनम शाह, अनिता बिष्ट, आशा ध्यानी, उमा श्रीवास्तव, रेेनू गौड़, पूनम वर्मा, कौशल्या मधवाल, रंजना कुकरेती, प्रतिभा जैन, सुमनलता रावत, सुषमा डोबरियाल, मंजू गुसाईं, नीलम नेगी, सुषमा नेगी, सुरेखा बिष्ट, बिमला तड़ियाल के साथ 426 छात्राओं ने प्रतिभाग कर नारी गरिमा की सुरक्षा का साझा संकल्प लिया।
छात्राओं को दिए टिप्स
छात्राओं को शिक्षा के साथ कानून की जानकारी भी होनी चाहिए। उन्हें स्थानीय थाना और क्षेत्रीय पुलिस चौकी का नंबर अपने पास रखना चाहिए।
- पूनम शाह, एसआई कोटद्वार।
छात्राओं को किसी भी आपराधिक घटना को छिपाना नहीं चाहिए। अभिभावक और शिक्षिका से अपनी परेशानी जरूर शेयर करनी चाहिए।
-रेनू गौड़, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी।
यदि छात्राओं के साथ छेड़छाड़ जैसी घटना होती है तो वे चिल्लाकर इसका विरोध करें। छात्राओं का चिल्लाना किसी का विरोध करने का सबसे आसान हथियार है।
-राखी पाल, कानूनी सलाहकार, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पौड़ी।
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