फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डॉक्टर दिया न बजट कैसे चलेगा कोटद्वार का बेस अस्पताल

विज्ञापन
विज्ञापन
कोटद्वार। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते राजकीय बेस अस्पताल कोटद्वार की व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। विभाग द्वारा एक माह पूर्व राजकीय संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार को बेस अस्पताल का दर्जा तो दे दिया, लेकिन बेस अस्पताल जैसी सुविधाएं नहीं दीं। यहां बजट और डाक्टरों की कमी बनी हुई है।
विज्ञापन

वर्ष 1970 में क्षेत्रवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए सरकार ने कोटद्वार अस्पताल को संयुक्त चिकित्सालय का दर्जा दिया था। तब सौ बेड के अस्पताल के लिए बजट निर्धारित किया गया था। छह मार्च 2018 को शासन ने संयुक्त चिकित्सालय को 300 बेड की सुविधाएं देने के बाद इसे बेस अस्पताल का दर्जा दे दिया, लेकिन अभी तक 300 बेड के मुताबिक बजट और डाक्टरों की व्यवस्था नहीं की। वर्तमान में आलम यह है कि सरकार ने बेस अस्पताल को संयुक्त चिकित्सालय का बजट 70 लाख रुपये देकर हाथ खड़े कर दिए। इसके कारण अस्पताल की व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं।
अस्पताल को संचालित करने के लिए करीब चार लाख रुपये बिजली का बिल, आठ लाख जनरेटर, 12 लाख रुपये संविदा कर्मियों के लिए और 25 लाख रुपये अस्पताल में भर्ती मरीजों के भोजन व सफाई आदि पर सालाना खर्चा होता है। इसके बाद दवाइयों पर सबसे बड़ी रकम खर्च की जाती है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन को सरकार से मिला बजट ऊंट के मुंह में जीरा के समान है।
विज्ञापन


डाक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं मरीज
अस्पताल में एक सर्जन, एक निश्चेतक और एक फिजीशियन की पिछले एक वर्ष से कमी चल रही है। बेस अस्पताल बनाने के बाद भी इस कमी को पूरा नहीं किया गया है। इसके कारण सर्जन को वीआईपी ड्यूटी और निश्चेतक के छुट्टी जाने पर अस्पताल में ऑपरेशन की व्यवस्था ठप हो जाती है।

300 बेड के बेस अस्पताल के लिए वर्तमान में 70 लाख बजट कम है। इसके लिए तीन गुना अधिक बजट की आवश्यकता है। अगले वित्तीय वर्ष में बेस अस्पताल को मानकों के हिसाब से बजट मिलने की संभावना है।
विज्ञापन

- डा. आईएस सामंत, सीएमएस राजकीय बेस चिकित्सालय कोटद्वार

-फोटो
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें