यमकेश्वर। शिक्षा विभाग के सरकारी विद्यालयों को आदर्श स्कूल बनाकर प्राइवेट स्कूलों की भांति शिक्षा देने की दावों की पोल खोल रहा है यमकेश्वर ब्लॉक का राजकीय आदर्श जूनियर हाईस्कूल ठांगर। विभाग ने इस स्कूल का नामकरण कर विद्यालय के नाम के आगे आदर्श शब्द तो जोड़ दिया, लेकिन विद्यालय में प्राइवेट स्कूलों की भांति सुविधाएं जुटाना भूल गया। आलम यह है कि आठ माह से मात्र दो शिक्षकों के भरोसे विद्यालय का संचालन हो रहा है। ऐसे में बच्चों को किस प्रकार की शिक्षा मिल रही होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
वर्ष 1968 में राजकीय जूनियर हाईस्कूल ठांगर की स्थापना हुई थी। वर्ष 2016 में इसे आदर्श विद्यालय घोषित किया गया। तब विद्यालय में करीब 75 बच्चे और दस शिक्षक तैनात थे लेकिन, आदर्श विद्यालय बनने के बाद से विद्यालय में शिक्षकों की लगातार कमी होने लगी, जिसके चलते शिक्षा व्यवस्था बदहाल होने के कारण अभिभावकों ने भी अपने बच्चों को अन्य स्कूलों में दाखिला दिलाना शुरू कर दिया। अब इस आदर्श विद्यालय की हालत यह है कि वहां दो शिक्षक और 50 बच्चे रह गए हैं। एक शिक्षक विभागीय कार्यों में व्यस्त रहता है, जबकि दूसरा विद्यालय के बच्चों को पढ़ाता है।
अभिभावक संघ के अध्यक्ष योगेंद्र सिंह, ग्राम प्रधान ठांगर कमला देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य सीला महावीर सिंह ने विभाग पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। कहा कि जब तक आदर्श विद्यालय नहीं था, तब तक विद्यालय में शिक्षकों की पूर्ति थी। आदर्श विद्यालय बनते ही विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्थाएं चौपट हो गई हैं। विद्यालय की बदहाली की शिकायत कई बार विभाग के आला अधिकारियों से कर चुके हैं, लेकिन विभाग बच्चों के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है।
उधर, खंड शिक्षा अधिकारी यमकेश्वर अमित कोटियाल ने कहा कि यह बात सही है कि आदर्श विद्यालय ठांगर में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। विभाग द्वारा आदर्श विद्यालयों के लिए विज्ञप्ति जारी की गई है। अगस्त के अंत तक आदर्श विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति हो जाएगी।
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