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बीईएल मोटर पुल की जड़ों तक पहुंच गए खननकारी, खतरा

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कोटद्वार। कोटद्वार की सुखरौ और खोह नदियों में मानकों को ताक पर चल रहे अंधाधुंध खनन से मोटर पुलों को खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों की शिकायत पर लोक निर्माण विभाग हरकत में तो आया है, लेकिन वह भी प्रशासन को सूचना देने के अलावा ज्यादा कुछ नहीं कर सका है। खोह नदी में गूलर मोटर पुल के बाद अब सुखरौ नदी में बीईएल मार्ग पर बने मोटर पुल तक खननकारी नदी को खोदते हुए आ पहुंचे हैं।
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यूपी-उत्तराखंड बार्डर पर स्थित सुखरौ नदी पर बने बीईएल पुल और सिमलचौड़ में सुखरौ मोटर पुलों के बीच जिला प्रशासन की ओर से खनन का पट्टा जारी किया गया है। पट्टे का मूल मकसद रिवर ट्रेनिंग पालिसी 2016 के तहत नदी के मध्य भाग का चैनलाइजेशन करना है। शासन की ओर से एक मई से नदियों में खनन के लिए मशीनों का उपयोग तो प्रतिबंधित कर दिया गया है, लेकिन नदी में अब भी एक समय में एक साथ 50 से 70 ट्रक, डंपर भरे जा रहे हैं। खननकारियों को पुलों की सुरक्षा का भी ख्याल नहीं है। खोह नदी में गूलर पुल के पिलर खाली करने के बाद अब बीईएल पुल का नंबर लग गया है। इस पुल से आवाजाही करने वाले तल्ला मोटाढांक, जीवानंदपुर, कृषि उत्पादन मंडी समिति व खूनीबड़ के ग्रामीणों ने अंधाधुंध खनन के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। कहा कि जिस आपदा के नाम पर नदियों को चैनलाइजेशन के पट्टे आवंटित किए गए हैं, यह अंधाधुंध खनन एक बार फिर से आपदा को न्योता दे रहा है।
मोटाढांक की प्रधान अनीता देवी, ग्रामीण मनमोहन दुदपुड़ी, भूपेंद्र सिंह, गंभीर सिंह, कमल सिंह, आलोक रावत व उमेश कुमार का कहना है कि प्रशासन और लोनिवि को मोटर पुल पर मंडराते खतरे की सूचना दे दी गई है। समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो सुखरौ नदी पर बने दोनों मोटर पुलों का हाल सुखरौ रेल पुल जैसा होने में देर नहीं लगेगी। इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ेगा। एसडीएम राकेश तिवारी का कहना है कि मामले का संज्ञान लिया जा रहा है।
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खोह नदी के गूलर पुल के बाद बीईएल पुल तक खनन की सूचना स्थानीय प्रशासन को दे दी गई है। विभाग अपनी रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेज रहा है।
-निर्भय सिंह, अधिशासी अभियंता लोनिवि दुगड्डा।
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