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भाबर की लाइफ लाइन दो माह से बाधित, लोग परेशान

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कोटद्वार। कोटद्वार भाबर की लाइफ लाइन कही जाने वाली चिलरखाल-लालढांग वन मोटर मार्ग नदियों के उफनाने और बरसात से क्षतिग्रस्त होने के कारण दो माह से बाधित है। सड़क पर बने रपटे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कई स्थानों पर सड़क का नामोनिशान ही मिट गया है। दो माह से सड़क बंद होने के कारण भाबर के लोग लालढांग, चमरिया और हरिद्वार की ओर आवाजाही नहीं कर पा रहे हैं।
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चिलरखाल-लालढांग वन मोटर मार्ग कोटद्वार और भाबर क्षेत्र के लोगों के लिए किसी लाइफ लाइन से कम नहीं है। करीब साढ़े बारह किमी का यह पैच लैंसडौन वन प्रभाग के आरक्षित वन क्षेत्र से होकर गुजरता है। इस मार्ग को पक्का करने के लिए उत्तराखंड सरकार दिसंबर, 2014 में शासनादेश जारी कर चुका है। यहां पक्की सड़क के साथ ही करीब साढ़े चार किमी लंबाई का फ्लाईओवर का निर्माण होना है। दो माह से बंद पड़ी इस सड़क की किसी ने सुध नहीं ली है, जबकि इस सड़क से कोटद्वार भाबर के दर्जनों गांव लालढांग, चमरिया, रसूलपुर समेत हरिद्वार के गांवों के लिए आवाजाही करते हैं। लालढांग से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कोटद्वार और भाबर के स्कूल कालेजों में पढ़ने के लिए आते हैं। काश्तकारों के लालढांग और चमरियां गांवों में रोजमर्रा के काम पड़ते हैं।
ग्रामीण जगदीश सिंह, राजेंद्र सिंह, नवीन चमोली, हरेंद्र मनराल व हरी सिंह का कहना है कि हर मानसून सत्र चिलरखाल-लालढांग मार्ग पर भारी गुजरता है। सड़क पर पड़ने वाले सिगड्डी सोत और मेहली सोत के रपटे हर साल नदी के उफान में बह जाते हैं। इस बार भी सड़क का आपदा से बुरा हाल है। लोगों का इस सड़क पर पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है। हरिद्वार की ओर जाने वाले अधिकतर वाहन यूपी होते हुए आवाजाही कर रहे हैं। ग्रामीणों ने वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत से सड़क को यातायात संचालन लायक बनाने की गुहार लगाई है।
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सड़क को यातायात संचालन करने लायक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। आपदा से सड़क कई स्थानों पर बुरी तरह क्षतिग्रस्त है। सड़क का मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में है।
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-वीरेंद्रपाल सिंह, रेंज अधिकारी लालढांग
-फोटो
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