कोटद्वार। दुगड्डा विकासखंड के ईड़ा मल्ला में कुछ लोगों द्वारा आरक्षित वन भूमि और वन पंचायत की भूमि पर कब्जे और दर्जनों पेड़ काटने का मामला प्रकाश में आया है। ग्रामीणों की सूचना पर हरकत में आए वन विभाग की टीम ने बृहस्पतिवार को गांव पहुंचकर मौका मुआयना किया। इस बारे में वन विभाग से आरटीआई में सूचना मांगी गई है।
घाड़ क्षेत्र के भरतनगर उर्तिच्छा निवासी रोशन सिंह समेत कई लोगों ने ईड़ा मल्ला गांव में आरक्षित और नापखेत की भूमि में लंबे समय से ईमारती पेड़ों के कटान और वन भूमि पर कब्जा कर पक्के निर्माण की शिकायत जिला प्रशासन से की है। ग्रामीणों ने कहा कि ईड़ा मल्ला में जिस स्थान पर अतिक्रमण कर निर्माण और पेड़ काटने की शिकायत की गई है, उस भूमि के एक ओर लैंसडौन वन प्रभाग की आरक्षित वन भूमि पड़ती है और दूसरी ओर राजस्व विभाग और वन पंचायत ईड़ा की भूमि पड़ती है। इस भूमि से दर्जनों ईमारती हरे पेड़ काटकर गायब कर दिए गए हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि उक्त भूमि का कुछ भूभाग राजस्व अभिलेखों में गांव की साध्वी जूपा माई के नाम पर आज भी दर्ज है, जिसके समतलीकरण पर पूर्व में विवाद भी हुआ था। इस मामले में तब तहसील प्रशासन द्वारा शांतिभंग के चालान काटे गए, लेकिन अतिक्रमण और पेड़ काटने के मामले को अनदेखा कर दिया गया। लोगों ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर गत जनवरी में तत्कालीन एसडीएम कमलेश मेहता ने मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी थी। इसमें वन विभाग की जमीन पर कब्जे के मामले की जांच संबंधित विभाग द्वारा किए जाने का उल्लेख किया गया है। लैंसडौन के डीएफओ वैभव सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आने पर कोटद्वार के रेंज अधिकारी आरपी पंत और एसओजी प्रभारी दिनेश चंद्र घिल्डियाल को जांच के लिए मौके पर भेजा गया है। जांच रिपोर्ट मिलने पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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