वर्ष 2015 में कोटद्वार के लकड़ी पड़ाव में दो पक्षों के बीच हुई मारपीट और विवाद के बाद हुए बवाल के 17 आरोपियों ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। जहां न्यायालय ने उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया। बताया जा रहा है कि बाकी लोग भी जल्द कोर्ट में सरेंडर करेंगे।
28 सितंबर, 2015 की रात को कोटद्वार के लकड़ी पड़ाव में दो पक्षों के बीच हुई मारपीट और विवाद की घटना के अगले दिन शहर में बवाल और तोड़फोड़ की गई थी। मामले में पुलिस ने एक व्यक्ति को नामजद करते हुए अज्ञात के खिलाफ बलवा, मारपीट समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। तब सीसीटीवी फुटेज और फोटोग्राफ के आधार पर लोगों की पहचान कर कुल 27 लोग नामजद किए गए थे। एक साल बाद 15 सितंबर, 2016 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इस मुकदमे को जनहित में वापस लेने का शासनादेश जारी कर दिया था, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया था। करीब साढ़े तीन साल बाद इस मामले में सभी 27 आरोपियों के खिलाफ गैरजमानती वारंट (एनबीडब्लू) जारी हुए तो बुधवार को 17 लोगों ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। अधिवक्ता अरविंद वर्मा और प्रवेश रावत ने बताया कि बुधवार को किरन देवी, पार्वती देवी, पिंटू उर्फ राजेश, प्रवीण उर्फ भंजू भाटिया, पवन भाटिया, राजकुमार, घनश्याम, महेंद्रपाल, वीरमति, अनिल, लक्ष्मी, ओमवती, राजेश्वरी, कृष्णकुमार लाल उर्फ केके, लक्ष्मण सिंह बिष्ट, अमित भारद्वाज और दीपू पोखरियाल ने कोर्ट में सरेंडर किया। न्यायालय में उनकी ओर से जमानत प्रार्थनापत्र दाखिल किए गए, जिन्हें कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। बताया कि दो लोगों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।