कोटद्वार। नगर निगम की अधिसूचना को रद्द करने के लिए नगर निगम विरोध संघर्ष समिति का कोटद्वार तहसील में धरना-प्रदर्शन जारी रहा। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश सरकार विधायकों के वेतन भत्तों को तो बढ़ाने में लगी है, लेकिन ग्रामीण जनता पर टैक्स थोपने के लिए गांवों को जबरन नगर निगम में शामिल करने का षड्यंत्र रच रही है। अधिसूचना रद्द न करने पर नगर निगम विरोध संघर्ष समिति ने अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है।
मंगलवार को कोटद्वार तहसील परिसर में समिति के अध्यक्ष डा. शक्तिशैल कपरवाण के नेतृत्व में भाबर के ग्रामीणों ने एकत्रित होकर धरना-प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ विधायकों के वेतन भत्तों में बढ़ोतरी कर रही है और दूसरी तरफ जनता पर जबरन नगर निगम थोप कर उनसे बढ़े वेतन भत्तों को नगर निगम के टैक्स के रूप में वसूलने की तैयारी कर रही है। कहा कि कोटद्वार और पौड़ी के प्रशासनिक अधिकारियों ने विधायक और मंत्री के दबाव में जबरन भाबर के गांवों को नगर पालिका में शामिल करवाने के प्रस्ताव सरकार को भेजे। कहा कि यदि नगर निगम की अधिसूचना को रद्द नहीं किया गया तो भाबर के ग्रामीण आमरण अनशन करने को मजबूर होंगे।
धरने में समिति के उपाध्यक्ष प्रवेंद्र रावत, यतेंद्र रूडोला, गोविंद सिंह रावत, विजय कंडारी, बृजपाल नेगी, प्रवीण कुमार, वीरेंद्र थलेड़ी, वीरेंद्र सिंह रावत, गजेंद्र तिवारी, प्रदीप नेगी, संतोष देवी, सतीश जदली, मनीष बिष्ट, जय सिंह, मानसिंह थापा, महानंद व परमानंद आदि मौजूद रहे।
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