कोटद्वार। शासन स्तर पर हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद अब लालढांग-चिलरखाल वन मोटर मार्ग के निर्माण के लिए क्लीन चिट मिल गई है। इस मामले में वन विभाग से प्रमुख वन संरक्षक जय राज ने प्रमुख सचिव, वन एवं पर्यावरण को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि उच्च स्तरीय परीक्षण में स्पष्ट हो चुका है कि इस सड़क के बनने से वन संपदा और वन्य जीवों को कोई खतरा नहीं है, इसलिए नियमानुसार बन रहे इस मार्ग को रोकना जनहित में उचित नहीं है।
लालढांग-चिलरखाल वन मोटर मार्ग के निर्माण कार्य पर लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ ने अस्थायी रूप से रोक लगाने के निर्देश दिए थे। इसको लेकर जहां वन मंत्री और वन विभाग के अधिकारी आमने-सामने आ गए, वहीं सड़क निर्माण पर लगी रोक से क्षेत्र के लोगों में भी गहरा रोष था। विभिन्न सामाजिक संगठन वन मंत्री के समर्थन में आ गए थे।
इस मार्ग को लेकर उपजे विवाद को देखते हुए बुधवार को एनटीसीए की टीम ने वन और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ मार्ग का निरीक्षण किया था। बृहस्पतिवार को प्रमुख वन संरक्षक, वन्य जीव/मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक उत्तराखंड की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें जारी कार्यवृत्त के अनुसार, लालढांग चिलरखाल मोटर मार्ग के सुदृढ़ीकरण का कार्य पारिस्थितिकीय रूप से पूर्णतया पोषणीय है और इसी कारण भारतीय वन अधिनियम 9172 की संबंधित धाराओं के तहत वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस लेने की आवश्यकता नहीं समझी गई। कहा गया कि सड़क निर्माण में वृक्षों का पातन नहीं किया जा रहा है। मार्ग के बनने से वन भूमि के कटाव पर रोक लगेगी। कलवर्ट एवं क्रॉस ड्रेनेज के निर्माण से वन्यजीवों का आवागमन सुलभ होगा। पत्र में मार्ग के बनने से वर्षाकाल के दौरान वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए नियमित गश्त होने का हवाला भी दिया गया है। पत्र में कहा गया कि प्रभागीय वनाधिकारी ने विभाग के हित में एहतियाती दृष्टिकोण को अपनाते हुए कार्य को अस्थायी रूप से रुकवाया था। उन्होंने कहा कि उच्च स्तरीय परीक्षण में स्पष्ट हो चुका है कि इस मार्ग के बनने से वन संपदा और वन्य जीवों को कोई खतरा नहीं है, इसलिए इस मार्ग को रोकना जनहित में उचित नहीं है।
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