कोटद्वार। जिला एवं सत्र न्यायालय पौड़ी ने वन कर्मियों से मारपीट के मामले में आरोपी की जमानत के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। याचिका वन विभाग की ओर से दाखिल की गई थी। अदालत ने कहा कि अवर न्यायालय ने अपने क्षेत्राधिकार के भीतर मामले के गुण दोषों के आधार पर जमानत के आदेश पारित किए हैं। इसमें किसी भी प्रकार की कोई विधिक त्रुटि अथवा अनियमितता नहीं की गई है।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद कुमार और प्रवेश रावत ने बताया कि वन क्षेत्राधिकारी किशोर नौटियाल की तहरीर पर पुलिस ने बृजमोहन उर्फ सोनू पुत्र माधवानंद, रूपानंद पुत्र माधवानंद, विवेक कुकरेती पुत्र प्रकाश कुकरेती निवासी पदमपुर सुखरो समेत 10 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मारपीट का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। आरोपियों पर सात अप्रैल को वन दरोगा याकूब अली और वन आरक्षी जगवीर सिंह के साथ मारपीट करने और एक वन कर्मी का मोबाइल तोड़ने का आरोप लगाया गया था। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने गत आठ अप्रैल को आरोपी बृजमोहन को गिरफ्तार कर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया था, जहां अदालत ने गुणदोष के आधार जमानत का पर्याप्त आधार पाते हुए आरोपी को जमानत दे दी थी। बृजमोहन की जमानत के खिलाफ वन विभाग की ओर जिला एवं सत्र न्यायालय में से प्रार्थनापत्र दाखिल किया गया। इसमें आरोपी पर वन कर्मियों पर सोच समझकर हमला करने और जबरन ट्रैक्टर ट्राली छुड़ाकर ले जाने की बात कही गई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के प्रश्नगत आदेश की पुष्टि की और प्रार्थनापत्र में कोई बल नहीं होने की बात कहते हुए जमानत के खिलाफ दाखिल प्रार्थनापत्र को निरस्त कर दिया।