कोटद्वार। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की ओर से मुंशी प्रेमचंद की कहानी बड़े भाई साहब का मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से शिक्षकों को शिक्षा में संवाद और नवाचार की संभावनाओं की जानकारी दी गई। बताया कि बेहतर शैक्षिक वातावरण के लिए संवाद की हमेशा से ही महत्वपूर्ण भूमिका रही है। संवाद से जहां सृजन और नवाचार के रास्ते खुलते हैं, वहीं चर्चा और परिचर्चा कर उन्हें क्रियान्वयन करने का मौका मिलता है। कार्यक्रम में कोटद्वार और अन्य ब्लॉकों से आए 80 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।
रविवार को बीरसी सभागार सुखरो में देर शाम आयोजित कार्यक्रम में फाउंडेशन के समन्वयक संजय नौटियाल ने बताया कि मौअज्जम अली के निर्देशन में बड़े भाई साहब कहानी को नाटक के रूप में तैयार किया गया है। जिसमें उनकी टीम और अन्य साथियों ने अलग-अलग भूमिका निभाई। मौअज्जम अली ने बताया कि मुशी प्रेमचंद ने यह कहानी लगभग सौ वर्ष पूर्व लिखी थी, लेकिन इस कहानी में शिक्षा व्यवस्था का जो चित्र प्रस्तुत किया गया है उसे पढ़कर ऐसा लगता है कि जैसे मानो यह कहानी वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर ही लिखी गई हो। इसमें कहानी और नाटक दोनों के गुण विद्यमान हैं, इस शैली में अभिनेताओं द्वारा कहानी को ज्यों का त्यों पढ़ते हुए इसकी घटनाओं को अभिनीत किया जाता है। इस प्रदर्शन में कहीं-कहीं दृश्यों के मध्य आपनी जुड़ाव बनाने की खातिर कहानी को संवादों में ढाला गया है, यह प्रक्रिया किस्सागोई का एक रुप है। उन्होंने बताया कि फाउंडेशन का उद्देश्य नाट्य विधा से समाज के लोगों को शैक्षिक और सामाजिक सरोकारों के प्रति चिंतन और जागरूक करने का है।
इस अवसर पर अलका बिष्ट, हर्षमनी, मोहन सिंह, राजीव थपलियाल, डा. मंजू कपरवाण, नागेंद्र प्रसाद, मुदित शाह, लक्ष्मी नैथानी, हरिचरण चतुर्वेदी, जागृति कुकरेती, पूनम प्रकाश, रिद्धि भट्ट, मोहिनी नौटियाल, जगदंबा प्रसाद, राजेश खत्री, रघुनाथ गुसाईं आदि मौजूद रहे।