कोटद्वार। मानसिक रूप से बीमार भूप सिंह को आखिरकार आठ साल बाद उनका परिवार मिल गया। कोटद्वार तहसील में धरगांव के सिमलखेत निवासी भूप सिंह दर-दर की ठोकरें खाता हुआ महाराष्ट्र पहुंच गया था। मई 2017 को वह रायगढ़ जिले के कर्जत कस्बे में घूम रहा था तो उस पर श्रद्धा संस्था से जुड़े स्वयं सेवी की नजर पड़ गई। वह भूप सिंह को अपनी पुनर्वास संस्था में ले गया। यहां दो महीने उपचार के बाद हालत ठीक हुई तो उसका ठिकाना पता किया गया। शनिवार को पूरे आठ साल बाद जब परिजनों को भूप सिंह मिला तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
भूप सिंह को महाराष्ट्र से लेकर आए बरेली निवासी शैलेश शर्मा ने बताया कि वह बरेली में मनो- समर्पण, मनो-सामाजिक सेवा समिति नाम से संस्था चलाते हैं। उनका महाराष्ट्र की श्रद्धा संस्था से संपर्क बना रहता है। कुछ दिन पूर्व उन्हें भूप सिंह बारे में पता चला तो वह महाराष्ट्र से उसे लेकर शनिवार को उसके गांव पहुंचे। शनिवार को जैसे ही शैलेश शर्मा भूप सिंह (35) को लेकर गांव पहुंचे, परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू थे। भूप सिंह के पिता सरदार सिंह ने बताया कि वह मानसिक रूप से बीमार था, इलाज भी चल रहा था, लेकिन एक दिन अचानक वह घर से लापता हो गया। उन्होंने शैलेश और उनसे जुड़े संस्था के लोगों का आभार जताया।