कोटद्वार। महर्षि कण्व की तपस्थली और देश को नाम देने वाले हस्तिनापुर के चक्रवर्ती सम्राट भरत की जन्मस्थली कण्वाश्रम में पर्यटन विकास की परियोजना को शासन से हरी झंडी मिल गई है। परियोजना के तहत कण्वाश्रम में करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली कृत्रिम झील और वैदिक सभ्यता को दर्शाते वैदिक गांव का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। एशियन डेवलपमेंट बैंक से मंजूर इस परियोजना के लिए गठित कार्यदायी एजेंसी ने यहां इंफ्रास्ट्रक्चर का कार्य प्रारंभ कर दिया है।
पूर्ववर्ती सरकार के शासनकाल में यहां के लिए स्वीकृत झील निर्माण परियोजना में आंशिक फेरबदल करते हुए इसे हरी झंडी दे दी गई है। परियोजना की निगरानी उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद कर रही है। एडीबी के कार्यों के लिए सरकार की ओर से गठित कार्यदायी एजेंसी आईडीआईपीटी (इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम फॉर टूरिज्म) ने यहां झील निर्माण के लिए खुदाई और ढांचागत विकास पर काम शुरू कर दिया है।
आईडीआईपीटी के अतिरिक्त कार्यक्रम निदेशक पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि कण्वाश्रम की पर्यटन योजना यहां के गौरव और इतिहास के मुताबिक बनाई गई है। परियोजना के तहत झील निर्माण के साथ ही अन्य सहूलियतें विकसित की जाएंगी। कण्वाश्रम में वैदिक विलेज का निर्माण किया जाएगा, जिसमें महर्षि कण्व की गन मेटल से आदमकद प्रतिमा स्थापित की जाएगी। महाकवि कालिदास द्वारा रचित अभिज्ञान शाकुंतलम में वर्णित मेनका की पुत्री शकुंतला और उसके पुत्र भरत की बाल्यकाल की प्रतिमाएं भी इसमें स्थापित की जाएंगी। जयपुर से इसके लिए कारीगर कण्वाश्रम पहुंचेंगे। पर्यटन विकास योजना में कण्वाश्रम में मंदिर, भव्य स्मारक, योग ध्यान का केंद्र के साथ ही पार्किंग, झील के किनारे पैदल पथ, कैंटीन सुविधाएं और चिल्ड्रन पार्क बनाया जाना प्रस्तावित है। कार्यदायी एजेंसी के इंजीनियर साहिल बिष्ट ने बताया कि परियोजना का काम पूरा करने के लिए 18 महीने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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