कोटद्वार। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की ओर से पश्चिम बंगाल के शांति निकेतन मेें आयोजित तीन दिवसीय आदिरंग महोत्सव में कोटद्वार की आशुकला समिति की संस्थापक सुमित्रा रावत ने उत्तराखंड की लोक संस्कृति के साथ प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने घसियारी, छपेली और थड़िया चौफुला लोकनृत्य और गीतों की प्रस्तुति देकर बंगाल में उत्तराखंड की छाप छोड़ी।
संस्कृति विभाग कोलकाता की ओर से शांति निकेतन दरौंदा में 25 से 27 मई तक आयोजित आदिरंग महोत्सव-2018 में उत्तराखंड का प्रतिधिनित्व करने के लिए कोटद्वार की सुमित्रा रावत को आमंत्रित किया गया था। सुमित्रा के लोकगीत भागुली तीले धारू बोला... पर उनकी टीम के कलाकारों ने छपेली लोकनृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी। इसके बाद हे दीदी हे भुली है व्वारी, हैरु भैरू सार ह्वेगे पल्या सारी.. पर घसियारी लोकनृत्य और लठ बोलणा तिलंजय की... गीत पर थड़िया चौफला लोक नृत्य प्रस्तुत किया।
महोत्सव से कोटद्वार पहुंची आशुकला समिति की संस्थापक सुमित्रा रावत ने बताया कि महोत्सव में लोगों ने उत्तराखंड की लोक संस्कृति को खूब पसंद किया।
टीम में योगेंद्र गडोई, कोरियोग्राफर मानवेंद्र रावत, नृत्य में निशा सिंह, बबीता नेेेगी, अन्वेशिका कुकरेती, वर्षा नेगी, तृप्ति रावत, प्रकाश चंद्र, संजय सिंह, रोबिन सुुंद्रियाल, संजू, संजय कुमार व प्रकाश नेेगी ने प्रतिभाग किया।
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