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एलपीजी गैस सिलेंडरों के धमाके से दहला कोटद्वार-पौड़ी हाईवे

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कोटद्वार। कोटद्वार-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-534 पर दुगड्डा और गूमखाल के बीच भदालीखाल के पास एलपीजी सिलिंडरों से भरे एक ट्रक में आग लग गई। धमाके के साथ 250 सिलिंडर फटने से पूरी घाटी दहल उठी। हाईवे और निकटवर्ती गांवों में तीन घंटे तक दशहत का माहौल बना रहा। फायर कर्मियों ने बमुश्किल आग पर काबू पाया। हाईवे पर धमाकों से पुलिस ने ट्रैफिक रोक दिया और वाया लैंसडौन आवाजाही कराई। ट्रक कोटद्वार से पाबौ जा रहा था।
सीओ जेआर जोशी ने बताया कि बुधवार को करीब 288 एलपीजी सिलिंडरों से भरा एक ट्रक बहादराबाद गैस प्लांट से पाबौ गैस एजेंसी के लिए रवाना हुआ। करीब तीन बजे भदालीखाल गांव के पास चढ़ाई चढ़ रहे ट्रक का अगला पहिया बर्स्ट हो गया। इसके बाद ट्रक के केबिन में अचानक आग लग गई। चालक और परिचालक ने ट्रक से कूदकर जान बचाई। देखते ही देखते ट्रक में आग धधकने लगी। इस बीच चालक और परिचालक के साथ कुछ लोगों ने ट्रक से सिलेंडरों को सड़क से पहाड़ी पर लुढ़का दिया, ताकि वे फटने से बच जाय, लेकिन आग धधकने और सिलेंडर फटने के डर से लोग 200 से तीन सौ मीटर दूर भाग खड़े हुए। ट्रक में सिलेंडर फटने लगे तो यह सिलसिला दो घंटे तक नहीं रुका। सिलेंडर फटने के धमाके होते ही आसपास के गांव के लोगों में दहशत मच गई। पूरी पहाड़ी धमाकों से दहल उठी। विस्फोट के बाद सड़क पर ट्रैफिक रोक दिया गया। पुलिस ने लैंसडौन-जयहरीखाल की ओर ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया। सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन धमाकों के कारण वह भी नजदीक नहीं जा सकी। शाम छह बजे किसी प्रकार आग पर काबू पाया गया। बताया गया कि करीब 38 सिलेंडरों को फटने से बचा लिया गया। धमाके में ट्रक के परखच्चे उड़ गए।
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मुख्यमंत्री के दौरे में व्यस्त रहा पुलिस-प्रशासन
कोटद्वार। बुधवार को जब गूमखाल के पास गैस के सिलेंडरों में धमाका हो रहा था, तब जिले का पूरा पुलिस प्रशासन मुख्यमंत्री के कोटद्वार दौरे की व्यवस्थाओं में व्यस्त था। फायर ब्रिगेड के वाहन भी मौके पर भेजे गए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। मुख्यमंत्री के लौटने के बाद ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने घटनास्थल का रुख किया। घटना की सूचना मिलने के बाद भी पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने सीएम के कार्यक्रम से हटने की जरूरत महसूस नहीं की। गनीमत यह रही कि घटनास्थल जंगल के बीच और आबादी से काफी दूर था। अन्यथा बड़े पैमाने पर जानमाल का नुकसान होता।
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