कोटद्वार। नैनीताल हाईकोर्ट ने सुखरो नदी में हो रहे खनन पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने यह आदेश नौ मार्च को कोटद्वार भाबर के एक नागरिक की याचिका पर दिए हैं। मामले में हाईकोर्ट ने सरकार और जिला प्रशासन को 16 अप्रैल तक काउंटर दाखिल करने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता ने अपनी रिट में सुखरो नदी में हो रहे खनन को रीवर ट्रेनिंग पॉलिसी 2016 का उल्लंघन बताया है।
कोटद्वार भाबर के शिवराजपुर गांव के निवासी हुकुम सिंह रावत ने अपने अधिवक्ता नवनीश नेगी के माध्यम से नैनीताल हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की, जिसमें सुखरो नदी के चैनलाइजेशन के नाम पर दिए गए पट्टे को रीवर ट्रेनिंग पॉलिसी 2016 के प्रावधानों का उल्लंघन बताते हुए इस पर रोक लगाने की गुहार लगाई। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि नदी के चैनलाइजेशन में यह प्रावधान किया गया है कि यह कार्य किसी स्थानीय निवासी अथवा सरकारी विभाग या एजेंसी से ही करवाया जा सकता है, जबकि सुखरो नदी का यह पट्टा हरिद्वार जिले के रुड़की निवासी एक व्यक्ति को दिया गया है, जो रीवर ट्रेनिंग पॉलिसी 2016 के उल्लंघन की श्रेणी में आता है।
नौ मार्च के इस आदेश पर जिला प्रशासन ने तीसरे दिन बुधवार को संज्ञान लेते हुए तहसीलदार, पटवारी और पुलिस भेजकर सुखरो में खनन कार्य रुकवाया। एसडीएम राकेश तिवारी ने बताया कि सुखरो नदी में खनन कार्य में लगी पोकलैंड समेत अन्य मशीनों को नदी से हटा दिया गया है। जल्द ही जिला प्रशासन की ओर से हाईकोर्ट में काउंटर दाखिल किया जाएगा।
उधर, कोटद्वार निवासी उमेश नौटियाल ने बताया कि नौ मार्च के हाईकोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन ने तब संज्ञान लिया, जब उन्हें 10 मार्च की शाम को कोर्ट की अवमानना का नोटिस मेल किया गया। उन्होंने कहा कि सुखरो नदी में दिया गया खनन का पट्टा नदी के चैनलाइजेशन की परिभाषा में ही नहीं आता है। यहां नदी का तल आसपास की कृषि भूमि से दो से पांच मीटर गहरा है।