सतपुली/कोटद्वार। गैरसैण विधानसभा के बजट सत्र में राज्य सरकार द्वारा आर्गेनिक खेती, बागवानी और कृषि के लिए बड़े बजट की व्यवस्था करने से पौड़ी जिले के जयहरीखाल ब्लाक के पीड़ा गांव के लोग खासे उत्साहित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि राज्य के बंजर पड़े खेतों में लेमन ग्रास की खेती राज्य की तकदीर बदल सकती है। लेमन ग्रास से बनाए गए तेल की देश और दुनिया में बड़ी मांग है। वन्यजीवों का आतंक भी इसमें बाधा नहीं पहुंचाता है।
गत वर्ष एक दिसंबर को ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने गृह जनपद पौड़ी के जयहरीखाल विकासखंड की पट्टी कौडिया के पीड़ा गांव में लेमन ग्रास आसवन संयंत्र का उद्घाटन किया था। इस योजना में खुद मुख्यमंत्री के बड़े भाई प्रगतिशील काश्तकार वीरेंद्र सिंह रावत की अगुवाई में ग्रामीण सामूहिक रुप से पिछले कई सालों से काम कर रहे हैं। लेमन ग्रास की खेती से ग्रामीण प्रतिवर्ष तीन से चार लाख तक की आय सृजित कर रहे हैं। वीरेंद्र रावत का कहना है कि उनके द्वारा 7 हेक्टेयर भूमि पर लेमन ग्रास की खेती की जा रही है। पिछले सात वर्षों से वह लेमन ग्रास की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि इसके लिए राज्य योजना में बजट की व्यवस्था की जाती है तो यह राज्य की तकदीर बदल सकता है। उनका कहना है कि अगर क्षेत्र में समूह बनाकर इस खेती को किया जाए तो सगंध पौधों की खेती राज्य के विकास में मील का पत्थर साबित हो सकता है। गत वर्ष उनके यहां लगाए गए लेमनग्रास आसवान संयंत्र से निकाले गए तेल की कीमत मार्केट में एक हजार रुपये प्रति लीटर है। वह प्रतिवर्ष 300 से 400 लीटर तेल निकाल रहे हैं। उनके इस प्रोजेक्ट में क्षेत्र के 25 से 30 बेरोजगारों को साल में 3 माह का रोजगार मिल रहा है।
लैंसडौन के विधायक दिलीप रावत ने बजट में आर्गेनिक खेती के लिए धन की व्यवस्था को अच्छा संकेत बताया। कहा कि सगंध फार्मिंग सूबे में रोजगार के नए आयाम स्थापित कर सकती है। काश्तकारों को पारंपरिक फसलों का मोह छोड़कर सगंध फार्मिंग करनी चाहिए।