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चचेरे भाई और भाभी के हत्यारे को आजीवन कारावास

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कोटद्वार/पौड़ी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश कंवर सेन ने बृहस्पतिवार को चचेरे भाई और भाभी की हत्या मामले में अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उस पर छह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अभियुक्त ने 13 अगस्त 2016 को रिखणीखाल के तोल्यूडांडा गांव में अपने चेचरे भाई और भाभी की धारदार हथियार से हत्या कर दी थी। इस मामले में कोर्ट हत्यारोपी की पत्नी सकुली देवी को पहले ही दोषमुक्त कर चुका है।
जिला शासकीय अधिवक्ता अवनीश नेगी ने बताया कि रिखणीखाल के तोल्यूडांडा के उमेदूबाखल तोक निवासी सुरेंद्र सिंह रावत ने 13 अगस्त 2016 को उनके आंगन से गुजर रहे चचेरे भाई प्रेम सिंह रावत (62) और भाभी सुलोचना देवी (58) की धारदार हथियार से हत्या कर दी थी। पूर्व प्रधान देवेंद्र सिंह रावत ने हत्या का मुकदमा राजस्व पुलिस में दर्ज कराया गया, जिसे बाद में रेगुलर पुलिस को जांच के लिए सौंप दिया गया। रिखणीखाल के तत्कालीन थानाध्यक्ष रवींद्र सिंह नेगी ने मामले की जांच कर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 12 गवाह पेश किए गए थे।
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बचाव पक्ष और अभियोजन की दलीलें और पत्रावलियों पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कंवर सेन की अदालत ने 13 अक्तूबर को कोटद्वार कैंप कोर्ट में अभियुक्त सुरेंद्र सिंह रावत को हत्या और जान से मारने की धमकी के दोनों मामलों का दोषी करार दिया था।
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश कंवर सेन ने बृहस्पतिवार सजा पर सुनवाई करते हुए हत्यारोपी को आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया। कोर्ट ने जान से मारने की धमकी के मामले में अभियुक्त को एक साल की सजा और एक हजार रुपये की सजा से दंडित किया है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। इसी मामले में आपराधिक षड्यंत्र की आरोपी सुरेंद्र सिंह रावत की पत्नी सकुली देवी को कोर्ट पूर्व में ही दोषमुक्त कर चुका है। शासकीय अधिवक्ता के अनुसार सुरेंद्र सिंह रावत अपने चचेरे भाई के परिवार से रंजिश रखता था। घटना से पहले कई बार उनका झगड़ा हुआ, जिसमें कई बार राजस्व पुलिस ने सुलह समझौता भी कराया था।
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