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वनाग्नि से क्षेत्र में बढ़ा पारा, धूं-धूंकर जल रहे हैं जंगल

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कोटद्वार/दुगड्डा/यमकेश्वर। मई माह में पारा बढ़ने के साथ ही लैंसडौंन वन प्रभाग के जंगलों में आग लगने का सिलसिला शुरू हो गया है। जंगलों में आग की घटनाओं से दिन में जहां तपिश बढ़ गई है, वहीं रात को क्षेत्र में गर्म हवाएं चल रही है। गर्मी से जनजीवन प्रभावित होने लगा है। दावानल से वन्यजीवों के लिये खतरा बढ़ गया है।
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गत दो दिनों से शिवालिक वृत के लैंसडौन वन प्रभाग, भूमि संरक्षण वन प्रभाग और रिजर्व प्रभाग के क्षेत्र में जंगल धूं-धूंकर जल रहे हैं। कांडाखाल क्षेत्र, घाड़ क्षेत्र, लैंसडौन क्षेत्र में भयंकर आग लगी हुई है। आग से पठूड़ अकरा क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। कांडाखाल क्षेत्र के जंगल भी दावानल से सुलग रहे हैं। मंगलवार शाम से पुरानकोट क्षेत्र के सिविल जंगलों में भी भीषण आग लगी हुई है। आग ऊंचाई की ओर बढ़ते हुए चरेख की चोटी तक पहुंचने लगी है, जिससे मालन नदी का उदगम क्षेत्र प्रभावित होने से मालन सूखने की कगार पर पहुंच गई है। दुगड्डा रेंज के आरक्षित क्षेत्र में झवाणा, आमसौड़ के समीप जंगलों में बुधवार रात आग लग गई। लैंसडौन के जंगल भी दावाग्नि से प्रभावित हैं। यमकेश्वर ब्लाक के ग्राम आवई, अमोला और यमकेश्वर के जंगलो में भी गत दो दिनों से आग लगी हुई है, जबकि थनूड़, खोबरा, बाडी, कोलसी के सिविल क्षेत्र के जंगल बुधवार रात से धधक रहे हैं। जंगलों में आग लगने से प्राकृतिक संपदा नष्ट हो रही है। जंगलों में आग लगने से क्षेत्र में गर्मी भी अधिक होने लगी है। जंगलो में आग लगने से पीने के पानी के स्रोत भी सूखने लगे है। आग को बुझाने के लिए न तो ग्रामीण ही आगे आ रहे हैं और ना ही वन विभाग के कर्मचारी।
लैंसडौंन वन प्रभाग के डीएफओ वैभव कुमार सिंह ने कहा कि आरक्षित वन क्षेत्र में लगी आग को बुझाने के लिए विभागीय कर्मचारियों को मौके पर भेजा गया है। आग से वन संपदा को हुए नुकसान का आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं हो पाया है। एसडीएम यमकेश्वर श्याम सिंह राणा ने कहा कि सिविल क्षेत्र के वनों में आग की कोई सूचना अभी तक नहीं है। कर्मचारियों को मौके पर भेजकर नुकसान का आंकलन किया जाएगा। राजस्व उपनिरीक्षक कांडाखाल अमित नेगी ने बताया कि कांडाखाल क्षेत्र के वनों में लगी आग पर काबू पा लिया गया है। आग से वन संपदा को हुए नुकसान का आंकलन किया जा रहा है।
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