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आर्मी ज्वाइन करने का सपना देख रही एथलीट निशा अपने पैरों पर खड़ी तक नहीं हो पा रही

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sports - फोटो : amarujala
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जयहरीखाल। एक ओर जहां सरकार खेल के क्षेत्र में बेटियों को बढ़ावा दे रही है, वहीं जयहरीखाल की होनहार एथलीट चैंपियन बेटी भालू के हमले में घायल अवस्था में अस्पताल के बिस्तर पर लेटकर वन विभाग की मदद की राह ताक रही है, लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
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जयहरीखाल ब्लाक के ग्राम कूरा निवासी सैनिक मोहन सिंह राणा की बेटी निशा राणा राजकीय महाविद्यालय जयहरीखाल में वर्ष 2014 से 2016 तक लगातार कॉलेज की एथलेटिक्स चैंपियन रही है। वह लैंसडौन में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली मैराथन में पांच बार और कोटद्वार की मैराथन चैंपियनशिप में दो बार जीत का परचम लहराकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी है। वह अपनी प्रतिभा के बल पर आर्मी में जाना चाहती है।
वह गत 28 दिसंबर को जयहरीखाल-लैंसडौन मार्ग पर सेना में भर्ती के लिए दौड़ का अभ्यास कर रही थी। तभी लैंसडौन के पास चर्च रोड पर भालू ने उस पर हमला कर दिया था। वर्तमान में आर्मी हॉस्पिटल देहरादून में उसका इलाज चल रहा है। अपनी दौड़ की प्रतिभा के बल पर आर्मी में जाने का ख्वाब देखने वाली निशा अपने पैरों पर खड़े होने की स्थिति में नहीं है, लेकिन वन विभाग उसकी ओर बेरुखी पूर्ण रवैया अपनाए हुए है। उसे भालू के हमले में घायल होने का आज तक मुआवजा नहीं दिया गया है। इसके कारण वह मायूस है।
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क्या कहते हैं विभागीय अधिकारी
वन्यजीवों के हमले के मामले में वन्यजीव द्वारा घायल करने पर ही मुआवजे का प्रावधान है। मेडिकल रिपोर्ट में वन्यजीव के हमले और जख्म होने का कोई जिक्र नहीं है। पीड़ित पक्ष की ओर से दिए गए प्रार्थनापत्र के आधार पर इसे स्पेशल केस बनाकर उच्चाधिकारियों और शासन को भेजा जाएगा।
-वैभव सिंह, डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग
राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के लिए खेल के दौरान घायल होने पर मुआवजे का प्रावधान है। राज्य और जिला स्तर पर खिलाड़ियों के लिए यह प्रावधान नहीं है। पीड़ित एथलीट इसके लिए विभिन्न योजनाओं से लाभ प्राप्त कर सकती हैं। पीड़ित को मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए जिला प्रशासन के माध्यम से प्रार्थनापत्र प्रस्तुत करना चाहिए।
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-प्रताप सिंह शाह, निदेशक खेल एवं युवा कल्याण देहरादून
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