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कण्वाश्रम में बनेगा मिनी चिड़ियाघर और रेस्क्यू सेंटर

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कोटद्वार। कोटद्वार में पाखरो गेट खोलने की मंजूरी के बाद केंद्र सरकार ने कोटद्वार विधानसभा को एक और सौगात दी है। केंद्र सरकार ने लैंसडौन वन प्रभाग के कण्वाश्रम स्थित मृग विहार को मिनी चिड़ियाघर और रेस्क्यू सेंटर के रूप में विकसित करने की मंजूरी प्रदान कर दी है। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की ओर से यह अनुमति उत्तराखंड सरकार को प्राप्त हो गई है। मिनी चिड़ियाघर बनने से कोटद्वार को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
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लैंसडौन वन प्रभाग की कोटद्वार रेंज के अंतर्गत ऐतिहासिक कण्वाश्रम में 1954 में अविभाजित यूपी सरकार के समय मालिनी मृग विहार की स्थापना की गई थी। यह मृग विहार करीब 12 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बना है। पूर्व में इस मृग विहार की देखरेख का जिम्मा वन विभाग के कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग के पास था, जो 2011 में लैंसडौन वन प्रभाग के सुपुर्द कर दिया गया। कण्वाश्रम के इस मृग विहार में वर्तमान में 41 चीतल एवं नौ सांभर मौजूद हैं। इसके संचालन के लिए वन विभाग के पास बजट का अभाव बना रहता है। कण्वाश्रम आने वाले हर पर्यटक के लिए मृग विहार एक विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। ऐसे में इस केंद्र के वजूद को बनाए रखने के लिए इसे मिनी चिड़ियाघर के रूप में तब्दील करने की मांग चल रही थी। पूर्व में लैंसडौन के तत्कालीन डीएफओ नितिशमणि त्रिपाठी ने इसे रेस्क्यू सेंटर बनाने का प्रस्ताव राज्य सरकार के माध्यम से केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को भेजा था, लेकिन केंद्र में ठीक तरीके से पैरवी न होने के कारण यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
भाजपा सरकार में वन एवं पर्यावरण मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते से निकालकर इसकी प्रबल पैरवी की। वन मंत्री ने इस मामले को उत्तराखंड में मानव और वन्यजीवों के संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को रोकने और वन्य जीवों के पुनर्वास से जोड़ते हुए दमदार तरीके से केंद्र के समक्ष उठाया। कई दौर की बैठकों के बाद आठ मार्च को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने लैंसडौन वन प्रभाग के कण्वाश्रम बीट स्थित मृग बिहार को रेस्क्यू और पुनर्वास सेंटर के रूप में विकसित करने की मंजूरी प्रदान कर दी है। इस केंद्र के रखरखाव और संचालन का जिम्मा लैंसडौन वन प्रभाग को दिया गया है, लेकिन बजट राज्य सरकार उपलब्ध कराएगी।
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