कोटद्वार। संविधान बचाओ संघर्ष समिति ने आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग के लिए 10 फीसदी आरक्षण देने संबंधी बिल को असंवैैैधानिक करार देते हुए मंगलवार को तहसील में प्रदर्शन किया। इस मौके पर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर आरक्षण बिल को अविलंब समाप्त करने, लोकसभा चुनाव बैलेट पेपर से कराने समेत सात सूत्री मांगों के निराकरण की मांग उठाई है।
मंगलवार को संविधान बचाओ संघर्ष समिति के कार्यकर्ता तहसील में एकत्र हुए। यहां उन्होंने 10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण देने संबंधी बिल का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया। इस मौके पर उपजिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया गया। ज्ञापन में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 16 (4) में जिस वर्ग को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, उसको पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने का प्रावधान किया गया है, लेकिन केंद्र सरकार उन वर्गों को आरक्षण दे रही है, जिनको पहले से ही शिक्षा, नौकरी और राजनीति में अतिरिक्त प्रतिनिधित्व प्राप्त है। उन्होंने कहा कि इंदिरा साहनी बनाम भारत सरकार के केस में एससी, ओबीसी को 49.5 फीसदी आरक्षण देने के लिए 50 फीसदी की सिलिंग लगाई गई है, ऐसे में सवाल यह उठता है कि केंद्र सरकार 10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था कैसे करेगी। इस मौके पर आरक्षण बिल को अविलंब रद्द करने, एससी, एसटी, ओबीसी को जनसंख्या के आधार पर पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने, ओबीसी पर लगे क्रीमिलेयर को अविलंब हटाने, ओबीसी, एनटी, डीएनटी, व्हीजेएनटी की जाति आधारित गणना करने, निजी क्षेत्र में कानून बनाकर आरक्षण लागू करने और लोकसभा चुनाव ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से कराने की मांग की गई। प्रदर्शन करने वालों में श्यामलाल खंतवाल, सतीश चंद्र ओडवाल, चंद्रमोहन, डा. सतीश प्रकाश, धर्म प्रकाश, रमेश, रवींद, शिवराम व पवन कुमार आदि शामिल रहे।
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