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118 में से 78 पद रिक्त, जंगल की सुरक्षा भगवान भरोसे

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कोटद्वार। प्रदेश के वन महकमे की लापरवाही के चलते लैंसडौन वन प्रभाग की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रही है। 43327.60 हेक्टेयर वन भूमि में पांच रेंजों में फैला लैंसडौन वन प्रभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। आलम यह है कि वन प्रभाग के लिए 188 वन कर्मियों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में 110 कार्यरत कर्मचारियों से काम चल रहा है। ऐसे में वन्यजीव और वन संपदा की सुरक्षा में वन कर्मियों को पसीना बहाना पड़ रहा है।
कोटद्वार, दुगड्डा, लैंसडौन, कोटड़ीढाक और लालढांग रेंज की 56 बीटों में बड़ी संख्या में वन्यजीव और बड़ी मात्रा में कीमती इमारती लकड़ी मौजूद है। वन प्रभाग में अन्य कर्मचारियों के अलावा मुख्य रूप से वन दरोगा के 16 और वन आरक्षी के 50 पद रिक्त होने के कारण एक वन आरक्षी को चार बीट और एक वन दरोगा के पास तीन सेक्शन का अतिरिक्त भार है। ऐसे में वन क्षेत्र के बीहड़ों की कैसे देखभाल हो रही होगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
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बावरी तस्कर गिरोह का रहता है खतरा
लैंसडौन वन प्रभाग की लालढांग और कोटद्वार रेंज यूपी से सटी हुई है। वन तस्कर बाबरी गिरोह पहले भी लैंसडौन वन प्रभाग में कई वारदातों को अंजाम दे चुका है। वर्ष 2014 में वन विभाग की ओर से उसे बाघ और गुलदार की खाल सहित पकड़ा भी गया था, जिससे विभाग ने सर्दियों में हाई अलर्ट घोषित किया है।
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विभागीय आकड़ों के अनुसार लैंसडौन वन प्रभाग में पाए जाने वाले मुख्य वन्यजीवों की संख्या।
हाथी- 175
टाइगर (बाघ)- 18
गुलदार- 57
भालू- 16
चीतल- 340
सांभर- 278
हिरन- 230

यह बात सही है कि वन प्रभाग में कर्मचारियों की कमी चल रही है, जिससे कर्मचारियों को अन्य बीटों का अतिरिक्त भार दिया गया है। इससे वन सुरक्षा में कठिनाई आ रही है। आला अधिकारियों से कर्मचारियों की मांग की गई है।
- संत राम, डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग
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