कोटद्वार। नगर निगम क्षेत्र में नक्शा पास करने का कार्य नगर पालिका से हटाकर जिलास्तरीय विकास प्राधिकरण को सौंप दिया गया है। एसडीएम कोटद्वार जिला विकास प्राधिकरण के पदेन संयुक्त सचिव बनाए गए हैं। प्राधिकरण का कोटद्वार तहसील में ही दफ्तर खोल दिया गया है। अधिसूचना जारी होने के बाद संपूर्ण नगर निगम क्षेत्र में अब बिना नक्शा पास किए भवनों का निर्माण नहीं कराया जा सकेगा।
डीएम सुशील कुमार ने बताया कि 28 नवंबर को पौड़ी जिले में प्राधिकरण की विधिवत स्थापना हो गई है। प्राधिकरण का मुख्यालय पौड़ी में होगा। पौड़ी दफ्तर के अधीन तहसील पौड़ी, श्रीनगर और चौबट्टाखाल का क्षेत्र होगा। इसके अलावा, कोटद्वार, थलीसैंण और यमकेश्वर में प्राधिकरण के क्षेत्रीय कार्यालय खोले गए हैं। कोटद्वार कार्यालय के अधीन कोटद्वार तहसील, लैंसडौन, सतपुली, जाखणीधार एवं उपतहसील रिखणीखाल के क्षेत्र पड़ेंगे। प्राधिकरण के तहत सभी नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत क्षेत्रों के अलावा सभी नेशनल हाईवे की 200 मीटर की परिधि वाले ग्रामीण अंचल शामिल किए गए हैं। नगर निगम, नगर पंचायत और पालिका क्षेत्रों को छोड़कर जिले के ग्रामीण अंचलों में 200 वर्ग मीटर में आवासीय भवन और 30 वर्ग मीटर में कामर्शियल भवन बनाने के लिए नक्शा पास कराने की जरूरत नहीं होगी।
एसडीएम कोटद्वार राकेश तिवारी ने बताया कि कोटद्वार तहसील में प्राधिकरण का कार्यालय खोल दिया गया है। नगर पालिका कोटद्वार की मानचित्र पास करने से संबंधित सभी फाइलें कब्जे में ले ली गई है। कोटद्वार नगर निगम में संपूर्ण नगर और भाबर क्षेत्र शामिल है। कहा कि जल्द ही मानचित्र पास कराने की प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी।
नगर निगम क्षेत्र का जल्द बनेगा मास्टर प्लान : डीएम
प्रशासक का कार्यभार ग्रहण करने के बाद डीएम ने ली पहली बैठक
कहा-कूड़ा निस्तारण के लिए हल्दूखाता में बनेगा ट्रंचिंग ग्राउंड
40 वार्डों के हिसाब से होगा नगर निगम का परिसीमन
अमर उजाला ब्यूरो
कोटद्वार। नगर निगम की अधिसूचना जारी होने के बाद बतौर प्रशासक पहली बार कोटद्वार पहुंचे जिलाधिकारी पौड़ी सुशील कुमार ने सोमवार को तहसील सभागार और नगर निगम मुख्यालय में कई बैठकें कीं। डीएम के दिशा-निर्देश मिलते ही नगर निगम समेत पूरी सरकारी मशीनरी हरकत में आ गई है।
नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बैठक में डीएम ने सोमवार से ही वार्डों के परिसीमन का कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। पूर्व की नगर पालिका क्षेत्र समेत नगर निगम में शामिल 73 गांवों को मिलाकर 40 वार्ड बनाए जाएंगे। अधिकारियों को नगर निगम क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। भविष्य में मास्टर प्लान के तहत ही नगर निगम क्षेत्र का नियोजित तरीके से विकास किया जाएगा।
डीएम ने कोटद्वार पहुंचते ही सबसे पहले तहसील सभागार में समस्त विभागीय अधिकारियों की बैठक ली। यहां उन्होंने नगर निगम में शामिल नए क्षेत्रों की व्यवस्थाओं को लेकर मंत्रणा की। उन्होंने नगर निगम में उपलब्ध संसाधन, उपलब्ध स्टाफ के बारे में जानकारी मांगी। बताया कि नगर निगम की प्राथमिकता कूड़े के निस्तारण की रहेगी। इसके लिए ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए वन भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। डीएम ने निगम के संपूर्ण क्षेत्र में जलापूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए कोटद्वार और भाबर में पुरानी पेयजल लाइनों के जीर्णोद्धार के निर्देश दिए। डीएम ने जीर्णशीर्ण पेयजल लाइनों को बदलने के लिए डीपीआर बनाने और पेयजल सप्लाई का समय बढ़ाने के निर्देश दिए।
इस मौके पर अधिकारियों को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जल निगम को इसका प्रपोजल तैयार करने, सिंचाई विभाग को बाढ़ सुरक्षा कार्यों को पूरा करने और राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग को एनएच पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए चौड़ीकरण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। बैठकों के बाद डीएम ने हल्दूखाता में प्रस्तावित ट्रंचिंग ग्राउंड का धरातलीय निरीक्षण किया।
- फोटो-
नगर निगम में शामिल गांवों को दस साल तक रखा जाए टैक्स मुक्त
कोटद्वार। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी नंदलाल धनगर ने कोटद्वार को नगर निगम बनाने पर क्षेत्रीय विधायक और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि बीपीएल श्रेणी परिवारों और नगर निगम में शामिल गांवों को कम से कम दस वर्ष तक किसी भी तरह के टैक्स से मुक्त रखा जाना चाहिए। सोमवार को उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में नंदलाल धनगर ने कहा कि नगर निगम विरोधी समितियों और राजनीतिक दलों के नगर निगम के विरोध में चल रहे आंदोलन के बावजूद सरकार ने जनहित में यह फैसला लिया है। कहा कि बीपीएल श्रेणी परिवारों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे नगर निगम के टैक्स का भार उठा सकें। उन्होंने बीपीएल श्रेणी के परिवारों समेत नए शामिल क्षेत्रों को नगर निगम के टैक्स से दस वर्ष तक मुक्त करने की मांग की है।
नगर निगम विरोध संघर्ष समिति ने शुरू किया असहयोग आंदोलन
सुखरौ पटवारी चौकी में किया धरना-प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
कोटद्वार। बिना जनसुनवाई कोटद्वार भाबर की 35 ग्राम पंचायतों के 73 गांवों को नगर निगम में शामिल करने के विरोध में नगर निगम विरोध संघर्ष समिति ने सोमवार से असहयोग आंदोलन शुरू कर दिया है। समिति के सदस्यों ने पटवारी चौकियों में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि जब तक सरकार नगर निगम के शासनादेश को वापस नहीं लेती, तब तक लड़ाई जारी रखी जाएगी।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार नगर निगम विरोध संघर्ष समिति से जुड़े ग्रामीण देवीमंदिर स्थित सुखरौ पट्टी पटवारी चौकी में एकत्रित हुए। यहां उन्होंने राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
समिति के अध्यक्ष डॉ. शक्तिशैल कपरवाण ने सरकार पर आरोप लगाया कि नगर निगम का निर्माण प्रॉपर्टी डीलरों और बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। नेताओं को चुनाव लड़ने के लिए करोड़ों का चंदा देने वाले बिल्डरों की नजर गांवों की बेशकीमती जमीन पर है। कहा कि नगर निगम की अधिसूचना भले ही जारी हो गई हो लेकिन अभी ग्राम पंचायतें भी वजूद में हैं। बिना ग्राम पंचायतों को भंग किए नगर निगम वजूद में नहीं आ सकता है।
उपाध्यक्ष प्रवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि कोटद्वार भाबर की जनता पर नगर निगम थोपा गया है। भाबर की चारों पट्टियों में नगर निगम के विरोध में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिए गए हैं। धरना-प्रदर्शन करने वालों में विजय ध्यानी, पूजा त्यागी, यूकेडी के जिलाध्यक्ष जगदीपक रावत, प्रवेश नवानी, कुसुम देवी, श्रवण सिंह रावत, गजेंद्र तिवारी, प्रदीप नेगी, विजय कंडारी, बीरेंद्र थलेड़ी, जगमोहन सेमवाल, धर्मेंद्र रावत, विनोद चौधरी, बालम सिंह नेगी, कांति सिंह, हरीश द्विवेदी, विकास घिल्डियाल, मदनलाल जदली आदि शामिल रहे।
फोटो समाचार
जिला पंचायत उपाध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख की सीट चंद दिनों की मेहमान
नगर निगम बनने के बाद 35 ग्राम पंचायतें, 27 बीडीसी और चार जिला पंचायत सीटें होंगी खत्म
-कोटद्वार भाबर में त्रिस्तरीय पंचायतों की स्थिति पर प्रशासन को शासन की गाइड लाइन का इंतजार
चंद्रमोहन शुक्ला
कोटद्वार।
आठ दिसंबर को कोटद्वार नगर निगम की अधिसूचना जारी होते ही कोटद्वार भाबर की 35 ग्राम पंचायतों, 27 क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत की चार सीटों पर संकट छा गया है। त्रिस्तरीय पंचायत की ये सभी सीटें कभी भी भंग हो सकती हैं। नगर निगम के वजूद में आने के बाद जिला प्रशासन को भी ग्राम पंचायतों की स्थिति पर शासन की गाइडलाइन का इंतजार है। नगर निगम क्षेत्र में पड़ने वाली ग्राम प्रधान, बीडीसी और जिला पंचायत की इन सीटों के भंग होने से दुगड्डा विकासखंड में त्रिस्तरीय पंचायती व्यवस्था का स्वरूप ही पूरी तरह बदल जाएगा।
जनसंख्या के लिहाज से दुगड्डा विकासखंड पौड़ी जिले का सबसे बड़ा ब्लॉक है, लेकिन नगर निगम के गठन के बाद दुगड्डा का यह दर्जा उससे छिन जाएगा। निगम क्षेत्र में शामिल 35 ग्राम पंचायतें, 27 बीडीसी सदस्य और चार जिला पंचायत की सीटें भी पूर्ववत काम कर रही है। एक ही क्षेत्र में नगर निगम और ग्राम पंचायत दोनों का वजूद बनने से जिला और तहसील प्रशासन असमंजस की स्थिति में है।
जानकारों का मानना है कि जब तक पंचायतों का वजूद बना हुआ है, तब तक नगर निगम प्रशासन उन क्षेत्रों में अपनी हुकूमत नहीं चला सकता। ऐसी स्थिति में जिला प्रशासन को शासन की गाइड लाइन का बेसब्री से इंतजार है। नगर निगम के प्रशासक का अतिरिक्त दायित्व संभाले जिलाधिकारी पौड़ी सुशील कुमार का कहना है कि इस बारे में शासन स्तर पर मंथन चल रहा है। जल्द ही निगम क्षेत्र में पड़ने वाली ग्राम पंचायतों, बीडीसी और जिला पंचायत की सीटें भंग हो जाएगी।
कोटद्वार भाबर में पंचायतें भंग होने पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुमन कोटनाला और ब्लाक प्रमुख सुरेश असवाल की सीटों पर भी संकट बना है। उनकी जिला पंचायत और बीडीसी की सींटे भी नगर निगम में शामिल हो गई हैं। नगर निगम वाले ग्रामीण अंचल को छोड़ दे तो 102 ग्राम प्रधानों वाले दुगड्डा ब्लाक में मात्र पहाड़ी क्षेत्र की 67 ग्राम पंचायतें शेष रह जाएंगी, जबकि बीडीसी सदस्य मात्र 13 ही बचेंगे। जिला पंचायत की चार सीटें खत्म होने से मात्र दो सीटें ही विकासखंड के पहाड़ी क्षेत्रों वाली वजूद में रहेंगी।