कोटद्वार। शुक्रवार रात से क्षेत्र में हो रही भारी बारिश से अभी तक लोगों को राहत नहीं मिल पाई है। शनिवार सुबह आई आपदा से क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचा है। कई जगहों पर सड़कों और पुलों का नामोनिशान नहीं रह गया है तो कहीं पुल के पिलरों की जडे़ं खाली होने से आवाजाही में खतरा बना हुआ है। कई बीघा जमीन में खड़ी फसल बर्बाद हो गई है। जिला प्रशासन ने राजकीय इंटर कालेज कोटद्वार व राजकीय प्राथमिक विद्यालय नंबर दो में पीड़ित परिवारों के लिए राहत शिविर लगाए हैं। शासन-प्रशासन की टीम न पहुंचने से लोगों में रोष है।
शुक्रवार रात 11 बजे से हुई मूसलाधार बारिश के चलते शनिवार सुबह तड़के साढ़े पांच बजे नदियां उफान पर आ गईं। इससे क्षेत्र में भारी तबाही हुई है। जंगलात रोड पर शिवपुर स्थित ट्यूबवेल के समीप हाथी सुरक्षा दीवार ढहने से एक मकान धराशायी हो गया। पनियाली गदेरे में आई बाढ़ से बिष्ट कालोनी में चर्च से लगी करीब 20 मीटर सड़क बह गई, जबकि आमपड़ाव से पनियाली गदेरे से लगी सड़क खस्ताहाल है। देवीरोड पर एक शौचालय बाढ़ में ढह गया। सनेह पट्टी में भी भारी तबाही हुई है। बहेड़ा स्रोत में आए उफान से रतनपुर गांव की पुलिया ढह गई। रतनपुर-सनेह मार्ग पर बनी पुलिया को भी स्रोत से खतरा उत्पन्न हो गया है। पुल के किनारे एप्रोच रोड बह गई है। ग्रामीण अनूप कुमार, रंजन प्रसाद पोखरियाल, बामदेव, राजेंद्र सिंह, सावित्री देवी, सुमनलता देवी व सुरेंद्र ने बताया कि ग्रामीण गदेरे की सफाई की मांग, सुरक्षा दीवार और चेकडैम बनाने की मांग की। कुंभीचौड़ में गदेरे में तटबंध बहने से दीपा भट्ट, अंजू पुंडीर, गीता पुंडीर, रितु पुंडीर व आशा देवी के धान और मंडुवे की फसल तबाह हो गई, जबकि सुशीला देवी, आशा देवी, रोशनी देवी के घर को जाने वाली सड़क और सुरक्षा दीवार बह गई। पदमपुर मोटाढांक में पातीराम कालोनी और उसके आसपास के इलाकों में मालन ने भारी तबाही मचाई है। पूर्व प्रधान तेजपाल पटवाल ने बताया कि उन्होंने युवाओं को साथ लेकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया और पीड़ित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा है। उन्होंने बताया कि मुरारी सिंह की गोशाला और किचन तो पहले ही बाढ़ में बह गया था। शनिवार को आई आपदा में उसके मकान का आधा हिस्सा भी बाढ़ में बह गया। सिंचाई विभाग ने ग्रामीणों को दो जेसीबी लगाकर पानी को डायवर्ट करने का आश्वासन दिया था। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की चार गायें भी बाढ़ में बह गईं। आपदा प्रभावित क्षेत्र में शासन-प्रशासन की टीम के अभी तक नहीं पहुंचने से ग्रामीणों में गहरा रोष है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से अविलंब सुरक्षा दीवार बनाने की मांग की है।
दो राहत शिविर खोले, आठ परिवारों को दी शरण
कोटद्वार। जिला प्रशासन द्वारा आमपड़ाव स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर दो और इंटर कालेज कोटद्वार में राहत शिविर खोले हैं। इंटर कालेज में शनिवार को किसी भी प्रभावित परिवार के नहीं पहुंचने से शिविर को बंद कर दिया गया है। आमपड़ाव नंबर दो आमपड़ाव क्षेत्र के आठ प्रभावित परिवारों को शरण दी गई है। शिविर में शरण लेेने वालों में शारदा देवी, तुलाराम, नीता, भीम सिंह, ध्यान सिंह, मौ. असलम, समीम, तस्लीम के परिवारों ने शरण ली हुई है। इसके अलावा उक्त लोगों के मकानों में रह रहे किराएदार ओमप्रकाश, गोपी, भीम भी राहत शिविर में शरण लिए हुए हैं। कोटद्वार सरकारी अस्पताल के डा. अनूप रयाल ने बताया कि सभी लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि अधिकांश पीड़ित परिवार सर्दी, जुकाम और एलर्जी से पीड़ित हैं। जलसंस्थान के अधिशासी अभियंता एलसी रमोला ने बताया कि सभी शिविरों में विभाग की ओर से पेयजल के टैंकरों की व्यवस्था की गई है।
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