सी हैरियर 602 युद्ध विमान लैंसडौन को समर्पित
नौसेना अध्यक्ष एडमिरल सुनील लांबा ने मैनवारिंग गार्डन में स्थापित किया बमवर्षक विमान
उप थलसेनाध्यक्ष ले. जनरल शरतचंद्र भी रहे कार्यक्रम में मौजूद
अमर उजाला ब्यूरो
लैंसडौन। बालकन युद्ध एवं फाकलैंड संघर्ष में अपनी युद्ध क्षमता का कौशल दिखाने वाले सी हैरियर युद्ध बम वर्षक विमान को नौसेना अध्यक्ष एडमिरल सुनील लांबा ने बुधवार को लैंसडौन को समर्पित किया। विधिवत पूजा अर्चना के साथ इस विमान को मैनवारिंग गार्डन में स्थापित कर दिया गया। इस मौके पर नौसेना अध्यक्ष ने कहा कि यह विमान अब लैंसडौन की शान बनकर देश दुनिया के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहेगा।
बुधवार को सैन्य नगरी लैंसडौन के मैनवारिंग गार्डन में आयोजित एक कार्यक्रम में एडमिरल सुनील लांबा ने कहा कि विभिन्न युद्धों में अपनी जांबाजी के करतब दिखाने वाली गढ़वाल रेजीमेंट को इस युद्ध विमान को सौंपते हुए उन्हें गर्व हो रहा है। युद्ध कौशल में गढ़वाली सेना व इस युद्ध बम वर्षक का उल्लेखनीय योगदान रहा है। रणबांकुरों की इस नगरी को यह तोहफा देते हुए वे हर्षित और गर्वित हैं। उन्होंने गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर को नौसेना की समुद्री सफर स्मारिका भी भेंट की। सूबेदार मेजर त्रिलोक ने यह स्मारिका ग्रहण की।
कार्यक्रम में विशेष रुप से मौजूद उप थलसेनाध्यक्ष ले. जनरल शरत चंद्र ने कहा कि दो फरवरी, 1990 को आईएनएस विराट गठबंधन संधि के तहत गढ़वाल रेजीमेंट के साथ एफिलिएट हुआ था। वायुयान वाहक पोत विराट में सी हैरियर विमान का संचालन युद्ध स्थितियों में किया जाता रहा। 6 मार्च 2017 को आईएनएस विराट को सैन्य बेड़े से अलग करने के बाद इस पोत से संचालित हो रहे युद्ध विमान को अलग किया गया। उन्होंने ही एडमिरल लांबा से इस विमान को रेजीमेंट मुख्यालय लैंसडौन में स्थापित करने का अनुरोध किया था, जिसे उन्होंने स्वीकार किया। उन्होंने रेजीमेंट की ओर से उनका आभार जताया। इस मौके पर जीआरआरसी के कमान अधिकारी ब्रिगेडियर इंद्रजीत चटर्जी, डिप्टी कमांडेंट कर्नल शलभ सनवाल, सेंटर एसएम त्रिलोक सिंह सहित नौसेना तथा थल सेना के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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क्या है बम वर्षक विमान सी हैरियर
लैंसडौन। दो फरवरी, 1990 में यह युद्ध बम वर्षक विमान सी हैरियर आइएनएस विराट के साथ जुड़ा। तब से इसका संचालन भी विराट के साथ किया जाता रहा। यह नेवी का पहला ऐसा बम वर्षक विमान है, जिसका आसमान, जमीन, समुद्र तीनों जगह दुश्मनों के युद्ध लड़ाकों पर मार करने में प्रयोग किया जाता रहा है। यह रायल नेवी में अप्रैल, 1980 में शामिल हुआ। ब्रिटिश सेना के इस विमान को 16 दिसंबर, 1983 को नेवी की हवाई विंग हंसा आईएनएस में शामिल किया गया। वर्ष 1987 में नौसेना ने सी हैरियर विमान को ब्रिटिश सेना से खरीद लिया। 20 फीट लंबाई के एक सीटर वाले इस विमान का वजन 12 टन था। एडमिरल अरुण प्रसाद इसके पहले पायलट थे। उनके साथ तकनीशियन विमल प्रसाद थे। लैंसडौन में स्थापना के दौरान इसका वजन मात्र पांच टन रखा गया है। इस विमान को गोवा से कोटद्वार लाने में तीन दिन का समय लगा। पहाड़ी रास्ता होने के कारण कोटद्वार से लैंसडौन लाने में चार दिन का समय लग गया। ब्यूरो