कोटद्वार। 15 जून को क्षेत्र में हुई पहली बरसात में पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। इससे दुगड्डा ब्लॉक के बिजनूर गांव में पेयजल आपूर्ति ठप पड़ी है। इसके अलावा दो जुलाई को स्कूल खुलने के दिन से ही बिजनूर गांव स्थित राइंका मांडई और प्राथमिक विद्यालय में भी पेयजल संकट बना हुआ है। आलम यह है कि दोनों विद्यालयों में मिड-डे मील बनाने के लिए भोजन माताओं को करीब एक किमी दूर से सिर पर पानी ढोना पड़ रहा है। ग्रामीणों और स्कूल प्रबंधन ने प्रशासन से पेयजल आपूर्ति बहाल करने की मांग की है।
बिजनूर गांव में स्थित राजकीय इंटर कालेज और प्राथमिक विद्यालय में पेयजल आपूर्ति के लिए ग्राम बिजनूर के भैंसडूगाड़ स्थित पेयजल स्रोत से वर्ष 2013 में स्वजल योजना के तहत अलग-अलग पेयजल लाइनें बिछाई गई थीं। 15 जून को पहली बारिश के दौरान स्रोत से जुड़ी पेयजल लाइनों में मलबा घुसने से लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। जीआईसी मांडई के प्रभारी प्रधानाचार्य अजीत कुमार का कहना है कि पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने से उनके विद्यालय और समीप ही स्थित प्राथमिक विद्यालय में पेयजल संकट बना हुआ है। पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने से गांव में भी पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। पानी न होने से विद्यालय में मध्याह्न भोजन बनाने में भी परेशानी हो रही है। स्थिति यह है कि भोजन माताओं और ग्रामीणों को प्यास बुझाने के लिए करीब एक किमी दूर मांडई और बड़ोलगांव से पानी ढोने को मजबूर होना पड़ रहा है। प्रधानाचार्य अजीत कुमार ने उपजिलाधिकारी को पत्र भेजकर पेयजल लाइन ठीक कराने की मांग उठाई है। उधर, ग्राम प्रधान गणेश प्रसाद मंजेडा ने बताया कि 15 जून को पहली बारिश में पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। पंचायत के पास पैसा न होने के कारण क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों की मरम्मत करा पाना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से पेयजल लाइनों की मरम्मत कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।