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पहाड़ों की तुलना में मैदानी क्षेत्रों में ज्यादा घट रहा लिंगानुपात: एसडीएम

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कोटद्वार। आशा सेवा संस्थान की ओर से यहां तहसील सभागार में आयोजित कन्या भ्रूण हत्या रोकथाम की गोष्ठी में वक्ताओं ने घटते लिंगानुपात पर गहरी चिंता जताई। कहा कि भ्रूण हत्या को रोकने के लिए समाज में जागरूकता लाने के साथ ही इसके कानूनी पहलुओं पर सख्ती से काम करने की जरूरत है। कहा कि आज समय बदल गया है, बेटे और बेटी में कोई अंतर नहीं रह गया, बल्कि बेटियां बेटों से कंधे से कंधा मिलाकर राष्ट्र निर्माण समेत कई क्षेत्रों में बुलंदियां छू रही है।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय पंत की अध्यक्षता में आयोजित गोष्ठी को एसडीएम राकेश तिवारी, अपर पुलिस अधीक्षक डा. हरीश वर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण भट्ट समेत कई बुद्धिजीवियों ने संबोधित किया। एसडीएम ने कहा कि पहाड़ों की तुलना में अधिक विकसित क्षेत्रों और शहरों में लिंगानुपात घट रहा है। इसके कारण सर्वविदित है, जरूरत केवल जागरूकता की है। समाज को रूढ़ीवादिता से बाहर निकलना होगा। कहा कि बेटी दो घरों को संस्कार देती है, जबकि बेटा एक घर तक ही सिमित रहता है। एएसपी हरीश वर्मा ने कहा कि दूसरी बेटी होते ही घर में तनाव का माहौल बनने लगता है। ऐसी सोच को जागरूकता से ही दूर किया जा सकता है। वरिष्ठ अधिवक्ता अरूण भट्ट ने कहा कि बेटियों को मुख्य धारा में लाने का वातावरण बनाने की जरूरत है। बेटियों को बेटों के समान मानते हुए उन्हें शिक्षित करने की जरूरत है। बार अध्यक्ष अजय पंत ने कहा कि बेटी के पैदा होते ही परिजनों को उसके दहेज देने की चिंता हो जाती है। यदि बेटियां उच्च शिक्षित होंगी तो दहेज की समस्या ही नहीं रहेगी। वक्ताओं ने उत्तराखंड में गिरते लिंगानुपात को भविष्य के लिए खतरे का संकेत बताते हुए बेटियों के कल्याण के लिए योजनाएं संचालित कर उन्हें सख्ती से धरातल पर उतारने की जरूरत है।
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गोष्ठी में केएल भारती, आशा सेवा संस्थान के सचिव राकेश चंद्रा, पीसीपीएनडीटी के जिला समन्वयक दिनेश शाह, रोहित वेद, सरिता नेगी, गौरव गोदियाल समेत कई ने विचार रखे।
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