कोटद्वार। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार में वनस्पति विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत डा. संजीव लाल ने अल्ट्रावायलेट रेडिएशन प्रभावित पादपों पर पादप हार्मोंस के प्रभावों पर शोध किया है। उन्होंने शोध कार्य में पाया कि सूर्य से निकलने वाली खतरनाक अल्ट्रावायलेट रेडिएशन पादपों और जीव जंतुओं को प्रभावित करती है। यह फसलों की वृद्धि और पैदावार को भी कम करती है। इस नकारात्मक प्रभाव को हम पादप हार्मोंस से कम कर सकते हैं, जिससे हमें अच्छी पैदावार प्राप्त हो सके। पादप हार्मोंस का छिड़काव पौधे पर पड़ने वाले अल्ट्रावायलेट-बी रेडिएशन के प्रभाव को कम करता है।
प्रो. डा. संजीव लाल ने बताया कि सामान्य तौर पर पादप हार्मोंस पौधों की वृद्धि व विकास में सहायक होते हैं और वे पौधों के विभिन्न भागों में पाए जाते हैं। पादप हार्मोंस एक रासायनिक पदार्थ है, जो पौधे के किसी एक भाग पर बनते हैं तथा उसी पौधे के दूसरे भाग पर अपना प्रभाव डालते हैं। पौधों में विभिन्न प्रकार के पादप हार्मोंस पाए जाते हैं, जिनमें से कुछ मुख्य हार्मोंस आक्सिन, साइटोकाइनिन और जिबरेलिन हैं, जो पौधों की वृद्धि और पैदावार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब हम इन हार्मोंस का बहुत कम मात्रा में पानी के साथ मिलाकर फसलों के ऊपर छिड़काव करते हैं तो फसलों की वृद्धि के साथ ही अच्छा उत्पादन भी प्राप्त होता है। डा. संजीव लाल ने अपना शोध कार्य ब्रेसीकेसी (सरसों) परिवार की दो किस्मों पर किया है।