कोटद्वार। कोटद्वार शहर और आसपास की आबादी को बाढ़ की चपेट में लेने वाले पनियाली गदेरे के डाइवर्जन की योजना के विरोध में ग्रामीणों ने संघर्ष समिति का गठन किया है। समिति ने पनियाली गदेरे का सुखरो नदी में डायवर्जन करने के निर्णय को जनविरोधी करार दिया है। कहा कि सुखरो पट्टी के गांव इस निर्णय को धरातल पर लागू नहीं होने देंगे। इससे क्षेत्र के अन्य गांव भी खतरे में पड़ जाएंगे।
बृहस्पतिवार को शिब्बूनगर पंचायत घर में हुई बैठक में क्षेत्र के प्रधान, बीडीसी सदस्य और ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन को आगाह किया है कि वे पनियाली गदेरे को प्रकृति के खिलाफ सुखरो नदी में डायवर्ट न करवाए। कहा कि इस योजना का निर्माण आरक्षित वन क्षेत्र से किया जाएगा, जहां से निचले गांवों में हर वक्त बाढ़ का खतरा बना रहेगा। यदि पनियाली गदेरे का पानी भी डायवर्ट किया जाता है तो शिवपुर, लालपुर, मानपुर, पदमपुर सुखरो, सिमलचौड़, शिब्बूनगर, ध्रुवपुर, रतनपुर सुखरो, हरिसिंगपुर, नयागांव से लेकर बालासौड़ तक तबाही मचनी तय है। ग्रामीणों ने कहा कि प्रकृति के विपरीत योजना बनाने से अच्छा होगा कि पनियाली गदेरे पर चिह्नित अतिक्रमण को हटाया जाए।
इस मौके पर पनियाली स्रोत डायवर्जन विरोधी संघर्ष समिति का गठन करते हुए चंद्रप्रकाश नैथानी को अध्यक्ष, देवेंद्र रावत को उपाध्यक्ष, डबल सिंह रावत महासचिव, गोविंद डंडरियाल कोषाध्यक्ष व विजय ध्यानी मीडिया प्रभारी बनाए गए हैं। बैठक में राजाराम अंथवाल, ओमप्रकाश सुंद्रियाल, मनोज रावत, हरिमोहन रावत, रमेश खंतवाल, कृष्णा बहुगुणा, विमला गुुसाईं, धर्मेंद्र रावत, सतेंद्र सिंह रावत व प्रेम सिंह रावत आदि मौजूद थे।
-फोटो