कोटद्वार। मालन नदी में वैध खनन खुलने के बाद भी क्षेत्र की अन्य नदियों में अवैध खनन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। रात के अंधेरे में अवैध खनन का धंधा जोरों पर है। अवैध खनन से जहां ग्रामीणों का नदी में जाने का मार्ग अवरुद्ध हो गया है, वहीं तटबंधों को भी खतरा उत्पन्न हो गया। सुखरौ नदी पर बने दोनों मोटर पुलों के बीच खननकारियों ने नदी का सीना छलनी कर दिया है।
वन निगम को कोटद्वार क्षेत्र की तीन प्रमुख नदियों मालन, सुखरौ और खोह में से केवल मालन नदी में खनन व चुगान की अनुमति मिली है। मालन नदी में लोनिवि के पुल से एक किमी उत्तर की ओर करीब बारह हेक्टेयर क्षेत्र में खनन की मंजूरी केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने दी है, लेकिन खननकारी मालन नदी के बजाय सुखरौ और खोह में बेधड़क अवैध खनन में जुटे हैं। बलभद्रपुर और नयागांव के ग्रामीणों की ओर से तहसील प्रशासन को अवैध खनन की लिखित शिकायत की गई है, लेकिन पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। कभी-कभार एक दो ट्रैक्टर ट्राली पकड़कर अवैध खनन पर दिखावे की कार्रवाई कर दी जाती है।
बलभद्रपुर निवासी एनएस रावत, राजेंद्र सिंह, गजेंद्र सिंह, दिग्पाल सिंह, सोबन सिंह, मोहनलाल का कहना है कि खननकारियों की शह पर नदी के किनारे राज्य के बाहर से आए लोगों ने झुग्गी बस्ती बसा ली है। नदी में खुलेआम शहर और गांवों का कचरा और मरे हुए जानवर फेंके जा रहे हैं। खननकारी बाढ़ सुरक्षा के तटबंधों के पत्थर बोल्डर भी ले गए हैं। नदी में एक किमी के दायरे में एक से दो मीटर के गड्ढे खोदकर रेत, बजरी धड़ल्ले से निकाला जा रहा है। एसडीएम राकेश तिवारी का कहना है कि अधीनस्थों को इस मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
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