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लालढांग मार्ग पर कामर्शियल वाहनों की आवाजाही शुरू

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कोटद्वार। उत्तराखंड राज्य की सीमा के भीतर कोटद्वार से हरिद्वार को जोड़ने वाली एक मात्र सड़क चिलरखाल-लालढांग मार्ग को मरम्मत के बाद व्यावसायिक वाहनों के लिए भी खोल दिया गया है। व्यावसायिक वाहनों की आवाजाही होने से कोटद्वार से हरिद्वार और देहरादून की सीधी कनेक्टिविटी हो गई है। गत बरसात में घने जंगल के बीच से गुजरने वाली यह सड़क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसके चलते कोटद्वार के लोगों को यूपी के नजीबाबाद होते हुए आवाजाही करनी पड़ रही थी।
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चिलरखाल-लालढांग वन मोटर मार्ग हर बरसात में सिगड्डी और मेहली सोत बरसाती नदियों के उफनाने के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाता है। लैंसडौन वन प्रभाग के बीच से गुजरने वाले इस मार्ग पर वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के दृष्टिगत सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही छोटे बड़े वाहनों का संचालन किया जाता है। भाजपा सरकार बनने के बाद गत अप्रैल में इस सड़क को वन एवं पर्यावरण मंत्री डा. हरक सिंह रावत के प्रयासों से व्यावसायिक वाहनों के लिए खोल दिया गया था। इस बीच भारी बरसात से इस पर वाहनों का संचालन मुश्किल हो गया था।
वन मंत्री के निर्देश पर लोनिवि दुगड्डा ने इस मार्ग पर गड्ढों का भरान कर किसी तरह सड़क को यातायात लायक बना दिया है। यात्री वाहनों के बाद अब इस मार्ग पर व्यावसायिक वाहनों का संचालन भी शुरू कर दिया गया है। इससे सिगड्डी सिडकुल के उद्यमियों को काफी राहत मिली है। वन मंत्री के ओएसडी विनोद रावत का कहना है कि चिलरखाल-लालढांग मार्ग के डामरीकरण के लिए गत 24 नवंबर को रिवाइज जीओ किया जा चुका है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सड़क को पक्का करने का काम शुरू हो जाएगा।
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कोटद्वार-भाबर की लाइफ लाइन है लालढांग मार्ग
चिलरखाल-लालढांग वन मोटर मार्ग कोटद्वार और भाबर क्षेत्र के लोगों के लिए किसी लाइफ लाइन से कम नहीं है। करीब साढ़े बारह किमी का यह पैच लैंसडौन वन प्रभाग के आरक्षित वन क्षेत्र से होकर गुजरता है। इस मार्ग को पक्का करने के लिए पूर्ववर्ती राज्य सरकार दिसंबर 2014 में शासनादेश जारी कर चुकी है। यहां पक्की सड़क के साथ ही करीब साढ़े चार किमी लंबाई का फ्लाईओवर का निर्माण होना है। फ्लाईओवर वाली सड़क तो अभी दूर की कौड़ी है, लेकिन क्षेत्रवासियों की मांग को देखते हुए सरकार फिलहाल इसी मार्ग को पक्का करने की कवायद में जुटी है। .
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