फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आपदा से क्षतिग्रस्त स्कूलों की भी सुध ले लो सरकार

विज्ञापन
विज्ञापन
कोटद्वार। बीते अगस्त माह में कोटद्वार क्षेत्र में आई आपदा में क्षतिग्रस्त सरकारी विद्यालयों की शासन और प्रशासन की ओर से सुध नहीं ली गई है। बाढ़ की चपेट में आने से टूटी पड़ी चाहरदीवारी जस के तस हालत में हैं, जिससे विद्यालय परिसरों में मवेशियों का जमघट लग रहा है। चाहरदीवारी न होने से इन स्कूलों में शाम के वक्त असामाजिक तत्वों का बोलबाला रहता है। हर रोज स्कूल खुलते ही शिक्षकों और स्कूली बच्चों को सफाई करनी पड़ रही है। शिक्षा विभाग को चाहरदीवारी समेत अन्य कार्य के लिए आपदा मद से बजट का इंतजार है।
विज्ञापन

गत तीन और चार अगस्त को कोटद्वार क्षेत्र में शहर से लेकर गांव तक आपदा ने तबाही मचाई थी। शहर में जहां बाढ़ के चलते स्कूल नंबर छह और नौ में बड़े पैमाने पर मलबा घुस गया था, वहीं भाबर के सत्तीचौड़, निंबूचौड़ और घमंडपुर स्कूलों में चाहरदीवारी ध्वस्त हो गई। प्राथमिक विद्यालय कौड़िया में भी भारी मात्रा में मलबा घुस गया था। चाहर दीवारी न होने के कारण स्कूल में मवेशियों का उत्पात मचा रहता है। कमोवेश यही हालत निंबूचौड़ प्राथमिक स्कूल की बनी है। घमंडपुर की प्रधान ज्योति देवी और निंबूचौड़ की प्रधान सुमन देवी का कहना है स्कूल के शिक्षकों की ओर से विद्यालय में बाढ़ से हुए नुकसान की रिपोर्ट उपशिक्षा अधिकारी कार्यालय में भिजवा दी गई है, लेकिन चाहरदीवारी बनाने के लिए बजट नहीं मिल सका है। चाहरदीवारी न होने से विद्यालय में परेशानी होना स्वाभाविक है।
नगर क्षेत्र के स्कूल नंबर नौ और छह में शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन समितियों के माध्यम से बाढ़ राहत के कार्य हो सके हैं। विद्यालयों में पठन-पाठन सुचारू कर दिया गया है। आपदा मद में जिला प्रशासन से चाहरदीवारी और भवन मरम्मत के लिए पैसा मांगा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

-अभिषेक शुक्ला, उपशिक्षा अधिकारी दुगड्डा।
-फोटो
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें