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श्रीनगर पुलिस के खिलाफ भड़के बालासौड़ के ग्रामीण

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कोटद्वार। जीएमओयू कंपनी के श्रीनगर गढ़वाल कार्यालय में बुकिंग क्लर्क के रूप में कार्यरत मनोज कुमार की संदिग्ध हालात में मौत को लेकर ग्राम पंचायत बालासौड़ के ग्रामीणों ने कोटद्वार तहसील में धरना-प्रदर्शन किया। उन्होंने राज्यपाल से मनोज की हत्या का अंदेशा जताते हुए मामले की एसटीएफ से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने मामले पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
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सोमवार को मृतक मनोज के पिता पारेश्वर दत्त कुकशाल के साथ बालासौड़ के ग्रामीण तहसील पहुंचे। उन्होंने पुलिस प्रशासन के खिलाफ तहसील में नारेबाजी के साथ प्रदर्शन कर धरना दिया। उन्होंने एसडीएम के माध्यम से प्रदेश के राज्यपाल को ज्ञापन भेजा। इस अवसर पर पारेश्वर दत्त कुकशाल ने कहा कि उनका पुत्र जीएमओयू कंपनी के श्रीनगर कार्यालय में लिपिक के पद पर कार्यरत था। गत 20 सितंबर को उसकी मौत की सूचना मिलते ही वे श्रीनगर पहुंचे, लेकिन तब तक पुलिस ने उनकी गैर मौजूदगी में शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था और कमरे से उसका सामान भी गायब मिला। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पुत्र की हत्या का अंदेशा जताया। कहा कि घटना के दिन ही उन्होंने इस मामले को संदिग्ध बताते हुए इसे पैसों के लालच में की गई हत्या करार दिया था। इस बारे में उन्होंने श्रीनगर थाने में तहरीर भी दी थी, लेकिन पुलिस ने प्राथमिकी तक दर्ज नहीं की है। यही नहीं, पुलिस द्वारा उनके पुत्र की कॉल डिटेल तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। उन्होंने राज्यपाल से मनोज की संदिग्ध मौत की एसटीएफ से जांच कराने की मांग की।
इस अवसर पर उपप्रधान संघ के अध्यक्ष विजय ध्यानी, आशा डबराल, देवेंद्र नैथानी, प्रकाश चंद्र ध्यानी, राकेश कुकशाल, सौरभ जखमोला, वीरेंद्र शर्मा, सोनी कुकशाल, प्रवेंद्र सिंह रावत, वीरेंद्र थलेड़ी, सतीश जदली, सुनील कुमार, नवीन कोटनाला, अतुल बडोला, गजेंद्र तिवारी, वंदना व शिवानी आदि मौजूद थे।
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