कोटद्वार। उत्तराखंड क्रांति दल और नगर निगम विरोध संघर्ष समिति ने कोटद्वार भाबर के अलग-अलग क्षेत्रों में भ्रमण कर नगर निगम के विरोध में मुहिम चलाई। इस मौके पर पर्चे बांटकर नगर निगम से भविष्य में होने वाले नुकसान और ग्राम पंचायतों के वजूद खत्म होने पर चिंता जताई गई। कहा कि नगर निगम के वजूद में आते ही जहां गांवों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा, वहीं पशुपालकों और काश्तकारों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
यूकेडी और नगर निगम विरोध संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बुधवार को ग्रास्टनगंज समेत सनेह पट्टी के गांवों में लोगों से संपर्क कर नगर निगम और ग्राम पंचायतों का फर्क बताया। यूकेडी जिलाध्यक्ष जगदीपक सिंह रावत, वरिष्ठ नेता नंदन सिंह रावत, हरीश द्विवेदी, सुनील सेमवाल, पुष्कर सिंह रावत, भगत सिंह नेगी, विनोद चौधरी, लोकमणि पोखरियाल और बालम सिंह नेगी ने कहा कि कोटद्वार भाबर के गांवों में नगर निगम का विरोध उत्तराखंड राज्य आंदोलन की तर्ज पर किया जाएगा। भाबर की सभी ग्राम पंचायतों और गांवों के लोगों को समय रहते इसके खिलाफ सड़कों पर उतरना पड़ेगा। कहा कि नगर निगम विरोध संघर्ष समिति के बैनर तले सभी संगठनों और राजनीतिक दलों के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। कहा कि भाबर के ज्यादातर भाजपाई भी राज्य सरकार के इस निर्णय से खफा हैं। वे खुलकर तो सामने नहीं आ रहे हैं, लेकिन आंदोलन को सहयोग करने का भरोसा दे रहे हैं। कहा कि कोटद्वार के गांव कृषि प्रधान गांव हैं। यहां के हालात हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून से अलग है। जनसंपर्क अभियान में संघर्ष समिति की सदस्य रंजना रावत, पूर्व प्रधान विजेश्वरी झिंकवाण, प्रवेंद्र रावत, प्रदीप नेगी समेत कई लोग शामिल थे।
उधर, बालासौड़ गांव में सूरज प्रसाद क्रांति, विजय ध्यानी, राम सिंह सैनी, अमित तिवाड़ी, अजय कुकरेती, हरीश जखमोला, चिरंजीलाल घिल्डियाल ने पर्चे बांटकर नगर निगम के विरोध में सड़कों पर उतरने का आह्वान किया। बताया कि लोगों की भावनाओं के खिलाफ बनाए गए निगम का ग्रामीण हर कीमत पर विरोध दर्ज कराएंगे। कहा कि गढ़वाल मंडल के पर्वतीय क्षेत्रों में भी सरकार ने जबरन नगर पालिकाओं का विस्तार किया है। जिसके खिलाफ लोग सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं।
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फोटो समाचार
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शुभ रात्रि
चंद्रमोहन शुक्ला