चंद्रमोहन शुक्ला
कोटद्वार। बिना किसी ट्रेनिंग के कोटद्वार की सनेह पट्टी स्थित जीतपुर गांव के 19 वर्षीय पंकज कुमार ने बांस की खपच्चियों से केदारनाथ मंदिर तैयार किया है। उसे इस काम में 15 दिन लगे। पंकज की आंखों में सामान्य बच्चों की तुलना में जन्म से ही करीब 40 फीसदी रोशनी कम है, लेकिन उसके हौसले उसकी इस शारीरिक कमी पर भारी पड़ रहे हैं। बड़ा होकर वह बैंबो आर्ट और हैंडीक्राफ्ट में अपना हुनर तराशना चाहता है। उसके द्वारा केदारनाथ मंदिर को हूबहू बनाया गया है। ग्रामीण उसके हुनर की प्रशंसा करते हुए इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने और नाम कमाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
पंकज बताते हैं कि वह कभी केदारनाथ नहीं गया। वर्ष 2013 की त्रासदी के बाद केदारनाथ के बारे में काफी देखा और सुना। आंखों की रोशनी कम होने के कारण उसकी पढ़ाई भी अच्छी नहीं हो सकी। डाक्टरों को दिखाया तो उन्होंने इसे जन्मजात बीमारी बताया। सीएमओ की ओर से उसे 40 प्रतिशत दिव्यांग का मेडिकल प्रमाणपत्र दिया गया है। तीन भाइयों में सबसे बड़े पंकज के पिता जहां दैनिक श्रमिक हैं, वहीं माता गृहिणी हैं। पंकज का कहना है कि करीब छह माह पूर्व शिमला से एक स्वयं सेवी संस्था उनके गांव में दिव्यांगों को बैंबो हैंडीक्राफ्ट सिखाने के लिए आई थी, जहां उन्हें गुलदस्ते और छोटे-मोटे आइटम बनाने सिखाए गए। गुलदस्ता सीखते हुए ही उसके दिमाग में केदारनाथ का मंदिर बनाने का विचार आया। पिता सतीश चंद्र ने उसे प्रोत्साहित किया। नजीबाबाद जाकर उसके लिए बांस खरीदकर लाए। दो तीन चाकू और फेविकोल भी लाकर दिया। केदारनाथ की एक बड़ी तस्वीर को कई एंगल से देखा और फिर बांस की खपच्चियां लेकर केदारनाथ मंदिर बनाने में जुट गया। उत्तराखंड बांस एवं रेशा परिषद के मास्टर ट्रेनर महावीर सिंह कुंवर ने पंकज द्वारा बैंबो आर्ट और हैंडीक्राफ्ट के आधार पर बनाई गई केदारनाथ की मूर्ति की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि यदि पंकज इसी क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहता है तो उसे वह निशुल्क ट्रेनिंग देने के लिए तैयार हैं। कहा कि बैंबों आर्ट और हैंडीक्राफ्ट में रोजगार की काफी संभावनाएं हैं।
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