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उत्तराखंड के जंगलों में झुलसा कीटों का संसार

Wed, 04 May 2016 12:34 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
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fire - फोटो : Amar Ujala
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पेरिस महासम्मेलन के बाद मध्य हिमालयी क्षेत्र की जिस बायो डायवर्सिटी को सहेजने के लिए केंद्र सरकार जूझ रही है, उसे उत्तराखंड के जंगलों की आग ने जला दिया।
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जीव-जंतु (फोना) संसार का 90 फीसदी हिस्सा कीटों (इन्सेक्ट्स) का है। चौड़ी पत्ती वाले वनों की आग से सबसे अधिक यही जीव जले हैं। लाखों की संख्या में इनके वास स्थल खत्म हो गए। स्थिति से कीट और वन्य जीव विज्ञानियों की बेचैनी बढ़ गई है। जूलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जेडएसआई) और भारतीय वन्य जीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) जीव-जंतुओं को हुए नुकसान के आकलन में जुट गया है।

फोना को सबसे अधिक नुकसान चौड़ी पत्ती वाले वनों के जलने से हुआ है। इनमें झाड़ियां अधिक होती हैं। जिनमें छोटे कीट-पतंगे और बड़े जानवरों के सबसे अधिक वास स्थल हैं। मिट्टी की क्वालिटी को अच्छा बनाने वाले सूक्ष्म जीव भी इसी में रहते हैं। सर्फेस फायर और ग्राउंड फायर की वजह से इनके वास स्थल पूरी तरह नष्ट हो गए, जिसका सीधा असर जैव विविधता पर पड़ा है। इससे हिमालयी क्षेत्र में जैव विविधता का सामंजस्य बिगड़ गया है। विज्ञानियों की आशंका है कि सूक्ष्म जीवों की कुछ प्रजातियां क्षेत्रीय होती हैं। ये खत्म हो सकती हैं।
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जूलोजिलकल सर्वे ऑफ इंडिया की नार्दन रीजनल सेंटर प्रभारी डा. अंजुम एन. रिजवी का कहना है कि आग से फोना का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। सबसे अधिक खतरा कीटों को है। जीव-जंतुओं की कुल आबादी में ये 90 फीसदी हैं। कीटों के साथ बड़े जानवरों के वास स्थल नष्ट होने का खतरा भारतीय वन्य जीव संस्थान को सता रहा है। संस्थान के डीन वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. जीएस रावत ने बताया कि जहां आग लगी है, वहां क्रमबद्ध तरीके से मैपिंग की जाएगी। फोरेस्ट कवर की क्षति होने से वन्य जीवों के वास स्थल खत्म हुए हैं।

आग से फोना को कितना नुकसान पहुंचा है। इसके लिए भारतीय वन्य जीव संस्थान से मैपिंग कराने के साथ पुनर्वास प्लान तैयार कराया जा रहा है। आग बुझने के बाद क्षति की स्थिति स्पष्ट होगी। इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं।
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- डा. एसएस नेगी, महानिदेशक वन एवं पर्यावरण

वन्य जीव-53 ग्रुप की प्रजातियां
स्तनपायी-100 ग्रुप की प्रजातियां
चिड़िया-743 प्रजातियां
रेप्टाइल्स-75 ग्रुप की प्रजातियां
एम्फीबियन-20 ग्रुप की प्रजातियां
विभिन्न कीटों की 3936 ग्रुप प्रजातियां (आग से सबसे अधिक नुकसान इन्हीं को पहुंचा है)
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