सोचिए यदि आपके घर में अजगर घुस जाए तो क्या हो। एक ओर अजगर की दहशत और दूसरी ओर आपके पास उसे भगाने के लिए कोई संसाधन नहीं तब क्या करेंगे।
सिवाय चिल्लाने के शायद कुछ नहीं लेकिन वन विभाग के कर्मियों को बिना संसाधन अजगर पकड़ने भी हैं और उन्हें सुरक्षित जंगलों में भी छोड़ना है।
वन विभाग के ऋषिकेश रेंज के अंतर्गत पड़ने वाले शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बरसात में सांप और अजगर निकलना आम बात है। विभाग को इन्हें पकड़कर जंगल में छोड़ने की जिम्मेदारी तो सौंपी गई है, मगर इसके लिए उसके पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
उत्तराखंड में कर्मचारी जान जोखिम में डालकर जहरीले सांपों को पकड़ने को मजबूर हैं। सरकारी महकमे कर्मचारियों पर काम तो लाद देते हैं, मगर उसकी एवज में सुविधाएं, संसाधन उपलब्ध नहीं कराते।
यही स्थिति वन कर्मियों की है। रेंज के वन कर्मियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि क्षेत्र में सांप निकलते ही लोग उनसे शिकायत करते हैं। जिसके चलते उन्हें मजबूरन जोखिम उठाना पड़ता है।
कर्मियों ने बताया कि विभाग को इस बाबत सूचित किया गया है, मगर सांप पकड़ने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। ऐसे में उन्हें मजबूरन सांप पकड़ने का खतरा मोल लेना पड़ता है।
उधर, रेंज अधिकारी गंगासागर नौटियाल ने माना कि बिना संसाधनों के जहरीले सांप-अजगर पकड़ना खतरनाक है। बताया कि उनके द्वारा विभाग के आला अधिकारियों को सांप पकड़ने के संसाधनों के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।