एक बार फिर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए सदन में बहुमत साबित करने के आठ दिन खासे महत्वपूर्ण साबित होंगे।
18 मार्च को सदन में हुए हंगामे के बाद हरीश रावत को राज्यपाल ने 28 मार्च तक सदन में बहुमत साबित करने को कहा था। अब फिर कोर्ट ने 29 अप्रैल को बहुमत साबित करने को कहकर हरीश रावत को करीब आठ दिन का समय दिया है।
राज्यपाल ने 19 मार्च को उस समय मुख्यमंत्री हरीश रावत को 28 मार्च तक सदन में बहुमत साबित करने को कहा था।
उस समय, यह आठ दिन का समय सरकार के लिए बेहद मददगार भी साबित हुआ था। कारण यह था कि दल बदल कानून के तहत कांग्रेस के बागी विधायकों की सदस्यता को समाप्त करने से पहले सात दिन का समय विधायकों को कारण बताने के लिए देना जरूरी था।
इस बाध्यता को भाजपा ने भी समझ लिया था और इसको देखते हुए भाजपा ने इसका विरोध भी जताया था। 28 मार्च को सदन में बहुमत साबित करने से ठीक पहले 27 मार्च को नौ विधायकों की सदस्यता भी समाप्त भी कर दी गई। नौ विधायकों की सदस्यता समाप्त होने का ही सबब रहा कि कांग्रेस पीडीएफ का साथ लेकर सदन में बहुमत साबित करने की स्थिति में आ गई थी।
अब कोर्ट ने 29 अप्रैल को सदन में बहुमत साबित करने का आदेश जारी कर फिर हरीश रावत को करीब आठ दिन का समय दिया है। इन आठ दिनों में भी सूबे की सियासत में कई उतार चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। भाजपा सर्वोच्च न्यायालय से स्थगन आदेश लाने की कोशिश कर सकती है।
कांग्रेस के बागी विधायकों की सदस्यता को लेकर भी फैसला सामने आ सकता है। दोनों दलों में टूट-फूट का अंदेशा भी बना रह सकता है। इतना साफ है कि इस बार के आठ दिन मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए इतने मुफीद साबित नहीं होने जा रहे हैं। कारण कि सदस्यों को बचाये रखने के लिए रावत को आठ दिन पसीना बहाना होगा।