उत्तरी हरिद्वार में खड़खड़ी क्षेत्र के गुसाई गली निवासी एक युवक की संदिग्ध बुखार से मौत हो गई। युवक चार दिन से एम्स ऋषिकेश में भर्ती था। उनका अंतिम संस्कार खड़खड़ी श्मशान घाट पर किया गया। उनकी मृत्यु से आसपास के लोगों में शोक छाया रहा। परिजनों के अनुसार युवक डेंगू से पीड़ित था। हालांकि जिला स्वास्थ्य विभाग ने ऐसी किसी घटना की जानकारी से इंकार किया है।
खड़खड़ी की गुसाई गली निवासी जोगेंद्र अरोड़ा (39) आठ दिनों से संदिग्ध बुखार से पीड़ित थे। पहले तो उन्होंने हरिद्वार के अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन तबीयत बिगड़ती चली गई। इस पर परिजनों ने उन्हें एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया। जहां इलाज के दौरान दीपावली के दिन रविवार को उनकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि जोेगेंद्र डेंगू से पीड़ित थे। उनकी मौत की सूचना से क्षेत्रवासियों के शोक छा गया। साथ ही दीपावली का उल्लास फीका हो गया। क्षेत्र के समाजसेवी राजकुमार अग्रवाल ने बताया कि जोगेंद्र अरोड़ा अपने पीछे पत्नी और दो छोटे-छोटे बच्चे छोड़ गए हैं। घर में कमाने वाले वही थे। उन्होंने बताया कि सोमवार को खड़खड़ी में उनका अंतिम संस्कार किया गया। वहीं, जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. गुरनाम सिंह ने बताया कि डेंगू से पीड़ित किसी मरीज की मृत्यु होने की सूचना नहीं है, मामले की जानकारी लेते हुए एम्स में उसकी रिपोर्ट मंगाई जाएगी। साथ ही उनके घर पर टीम भेजकर जांच कराई जाएगी।
हरिद्वार। डेंगू का कहर क्षेत्र में लगातार जारी है। ठंड शुरू होने के बावजूद डेंगू से पीड़ित मरीजों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हालांकि अब दीपावली पर आतिशबाजी और साफ सफाई से डेंगू का लार्वा पनप नहीं सकेगा। इसके बाद बामुश्किल ही डेंगू से लोग पीड़ित हो सकेंगे।
डेंगू ने अगस्त महीने से पूरा कहर बरपाया है। डेंगू से निपटने के लिए जिला और नगर स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई बड़ा प्रयास नहीं किया गया। जिला मलेरिया विभाग आशाओं के साथ घर-घर जाकर लार्वा ढूंढने का काम किया। नगर स्वास्थ्य विभाग की ओर से सड़कों पर कीटनाशकों का छिड़काव किया गया। सड़कों पर फॉगिंग भी की गई, लेकिन प्रयास नाकाम साबित रहा। डेंगू के एलायजा रिपोर्ट में डेंगू से पीड़ित मरीजों का आंकड़ा करीब 500 पहुंच गया, जबकि संदिग्ध मरीजों की संख्या 1300 तक पहुंच गई। अब विभाग दावा कर रहा है दीपावली पर हुई आतिशबाजी और साफ सफाई डेंगू का लार्वा नहीं पनप सकेगा। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. गुरनाम सिंह ने बताया कि आतिशबाजी के धुंए में खतरनाक गैसें होती है, इससे मच्छर समाप्त हो जाता है, इससे अगले दिनों में मच्छर नहीं पनपता। साथ ही घरों में हुई साफ सफाई से घरों एवं आसपास में जमा पानी के कारकों को समाप्त कर दिया जाता है, इससे लार्वा नहीं पनप सकेगा।