हरिद्वार। आखिरकार वर्किंग हॉस्टल शुरू हो गया है। इससे कामकाजी महिलाओं को हॉस्टल में रहने के लिए आसरा मिल सकेगा। वह अपना काम करने के लिए हाॅस्टल में सुरक्षित ढंग से रह सकेंगी। दो साल से बिजली कनेक्शन कटा होने से हॉस्टल बंद पड़ा था। सरकार की ओर से इंद्रा प्रियदर्शनी कामकाजी महिला छात्रावास बहादराबाद हरिद्वार को संचालित करने के लिए पीपीपी मोड पर एक संस्था को दिया गया था, लेकिन कुछ दिनों तक संचालित करने के बाद ऊर्जा निगम का नौ लाख 27 हजार 24 रुपये का बिजली बिल बकाया हो गया था। जिसे देने में संस्था ने हाथ खड़े कर दिए गए थे। बिजली के अभाव में वर्किंग हॉस्टल वर्ष 2023 में बंद हो गया था, तब से अब तक महिलाओं को हाॅस्टल का काेई लाभ नहीं मिल रहा था।
20 अगस्त को तत्कालीन सीडीओ आकांक्षा कोंडे की ओर से वर्किंग हॉस्टल का निरीक्षण किया गया था। उनकी पहल पर सरकार की ओर से बकाया बिजली का 40 प्रतिशत बिल जमा करा दिया गया है। महज 60 फीसदी बिजली बिल संचालन कर रही संस्था ने जमा कराया है।
जनवरी में ऊर्जा निगम की ओर से वर्किंग हॉस्टल में बिजली कनेक्शन कर दिया गया था। कनेक्शन होने से वर्किंग हाॅस्टल के कमरों में बिजली संचालित हो गई था। इसके बावजूद भी हॉस्टल शुरू नहीं हो सका था। डीपीओ ने संस्था को हॉस्टल शुरू करने के लिए पत्र भेजा था। अब वर्किंग हॉस्टल को शुरू कर दिया गया है। महिलाएं हॉस्टल में आकर रह सकती हैं। उन्हें बिजली और पानी दोनों सुविधाएं हाॅस्टल में मिलेंगी।
94 कमरों में बना है वर्किंग हॉस्टल
वर्किंग हॉस्टल 94 कमरों में बना हुआ है। इसके एक कमरे एक साथ दो महिलाएं रह सकती हैं। इससे वर्किंग हॉस्टल में 188 महिलाएं रह सकती हैं। वर्किंग हॉस्टल सिडकुल क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं के लिए बहुत लाभदायक हैं, क्योंकि उन्हें अगर कहीं भी रहने के लिए कमरा नहीं मिलता है तो वह वर्किंग हाॅस्टल में रह सकती हैं। ये सुरक्षा के लिहाज से भी महिलाओं के लिए सुरक्षित है।
इंद्रा प्रियदर्शनी कामकाजी महिला छात्रावास बहादराबाद हरिद्वारशुरू हो गया है, ऐसी महिलाएं जिन्हें किराये पर रहना है, वह सभी कामकाजी महिलाएं हॉस्टल में रह सकती हैं।
धर्मवीर सिंह, डीपीओ, हरिद्वार