कांवड़ यात्रा के अंतिम चरण में अब गंगा की नीलधारा के साथ-साथ भक्ति और श्रद्धा की एक नदी भी बहने लगी है। गंगा के समानांतर चल रहे यह कांवड़िए बम-बम का जयघोष कर रहे हैं और रास्ते भर हर- हर महादेव का निनाद करते हुए अपने नगरों को लौट रहे हैं। गंगा तट से चंडीघाट के रास्ते वापस लौटने वाले कांवड़ियों का तांता लगा हुआ है।
मंगलवार को सप्त सरोवर से लेकर चंडीघाट तक टूटी फूटी सड़कों पर कांवड़िए ही कांवड़िए नजर आए। इसी मार्ग पर यातायात भी चल रहा है, इसलिए शिवभक्तों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कांवड़ भरने के लिए मालवीय द्वीप पर जगह न होने पर हजारों कांवड़िए रोड़ी बेलवाला से अपनी कांवड़ भर रहे हैं। भीमगोड़ा पुल के पास पंतद्वीप पर कांवड़ का नियमित बाजार तो नहीं लगा है, लेकिन मैदान में कई दुकानदार बैठकर कांवड़ बेच रहे हैं। बनी बनाई कांवड़ों के साथ साथ कांवड़ियों द्वारा लेकर आई गई पुरानी कांवड़ को भी इसी मैदान में सजाया जा रहा है। हरकी पैड़ी के अलावा जयराम घाट पर भी हजारों कांवड़ियों ने बाकायदा कांवड़ का पूजन कराकर जल भरा। इसी तरह सप्तसरोवर क्षेत्र के घाटों पर जल भरा जा रहा है। जल भरने वालों की अधिक भीड़ सर्वानंद घाट पर देखी गई। इन घाटों पर कोई प्रबंध प्रशासन द्वारा नहीं किया गया, कांवड़िए भीड़ को अपने आप ही नियंत्रित कर रहे हैं।
गंगा के मैदानों में हजारों की संख्या में डाक वाहन लेकर भी कांवड़िए एक चरण में पहुंच गए हैं। वाहनों से आए कांवड़िए गंगा जल भरकर साथ साथ वापस लौट रहे हैं। डाक वाहन हरिद्वार रुड़की मार्ग से भी लगातार गुजर रहे हैं। किसी भी वाहन में संगीत का शोर सुनाई नहीं पड़ रहा। अलबत्ता हरियाणा से आई डाक कांवड़ छोटे छोटे स्पीकर बजाकर मनोरंजन करती हुई लौट रही हैं। शिवरात्रि पर डाक कांवड़ियों की सड़कों पर भागम भाग बिल्कुल नहीं है। गंगा पार के रास्ते अधिकांश कांवड़िए पैदल ही लौट रहे हैं। मंगलवार को बिजनौर और नजीबाबाद से करीब दो लाख कांवड़िए गंगा पार के मैदानों में पहुंचे। इन कांवड़ियों ने नीलधारा के उस पार से कांवड़ भरी और वापस भी लौटने लगे। कांवड़ यात्रा इस समय परवान चढ़ गई है। नीलधारा के उस ओर दूर तक श्रद्धा की एक नदी सड़कों पर बहती नजर आ रही है।