हरिद्वार नगर और ग्रामीण से दो संत चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों ने जीवन भर भक्तों को आशीर्वाद दिया है। हरिद्वार ही नहीं देश के विभिन्न भागों से भक्तगण उनका आशीष लेने आते रहे हैं। अब चुनाव की बलिहारी कि इन संतों को मतदाताओं से अपने सिर पर हाथ रखवाकर आशीर्वाद लेना पड़ रहा है। घरों के बुजुर्गों के पांव छूने में भी संतों को गुरेज नहीं है।
संतों ने पहले भी धर्मनगरी से राजनीति में किस्मत आजमाई है। यह नजारा देखकर मन ही मन लोग हंसते हैं और उनके जाने के बाद चुनाव की मजबूरियों पर तंज भी कसते हैं। ये संत आश्रमों और अखाड़ों में उन संतों का आशीर्वाद मांगने भी जा रहे हैं, जिनके साथ बैठ कर वे गलबतियां किया करते थे। गलियों में आम आदमी से हाथ मिलाना संत प्रत्याशियों की मजबूरी हो गई है। हरिद्वार के बाजार क्षेत्र में जब संत प्रत्याशी निकलते हैं तो क्षेत्रवासी उन्हें बड़े आदर के भाव से देखते हैं। संत का बाना श्रद्धा उत्पन्न करता है, किंतु तब बड़ी विचित्र स्थिति हो जाती है जब किसी बुजुर्ग से संत अपने सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देने का आग्रह करते हैं।
उस समय तो हद ही हो जाती है तब घर में बुजुर्ग महिला को देखकर संतगण पांव छूने के लिए लपकते हैं। बेचारी महिलाएं जो जीवन भर साधु संतों के पैर छूती आई, यह नजारा देखकर बड़ी विचलित हो जाती हैं। अलबत्ता चुनाव है तो यह सब होना ही है। हरिद्वार में यह नजारे पहले भी देखे हैं और अब फिर मजे लेकर हरिद्वारवासी मतदाता देख रहे हैं।