नगर निगम ने रेलवे रोड के नाले पर फिर से खोखे लगवाने के लिए वहां शनिवार को लोहे की रेलिंग को जेसीबी से उखाड़ने का काम शुरू करा दिया है।
अतिक्रमण से नाले की निकासी बंद होने से रेलवे रोड पर घुटनों तक जलभराव की स्थिति बनने से जिला प्रशासन ने अगस्त 2010 में बलपूर्वक अतिक्रमण ध्वस्त कर अवरुद्ध जल निकासी सुचारु कराई थी। बाद में तत्कालीन जिलाधिकारी आर मीनाक्षी सुंदरम ने आपदा मद से नाले का 56 लाख रुपये से पुनर्निर्माण करा दिया था। नाले पर अतिक्रमण रोकने तथा जल निकासी के सुचारु होने के लिए नाले के दोनों ओर सड़क तथा रेलवे की बाउंड्री की तरफ से लोहे की मजबूत रेलिंग लगवा दी थी। अब छह साल बाद भाजपाई नगर निगम बोर्ड इस नाले पर 500 रुपये प्रतिमाह के किराये पर 222 दुकानों का खोखा बाजार स्थापित कराने जा रहा है।
नाला बंद कर खोखों का नया बाजार देने वाले मेयर मनोज गर्ग का इरादा शहर में वेडिंग जोन स्थापित कर अपने कार्यकाल में अंतिम वर्ष में 2000 बेरोजगारों के खोखे लगवाकर रोजगार उपलब्ध कराने का है। मेयर का कहना है कि इससे बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा तो नगर निगम को भी लाखों की आय होगी। वे इसे जनहित का काम मानते हैं।पार्षदों को भी एक-एक खोखा मनपसंद जगह पर लगवाने का भरोसा देकर नाले पर फिर से अतिक्रमण कराने के काम में समर्थन जुटा लिया गया है। एक पार्षद अपने साले का नाम भी खोखा दावेदारों की सूची में देखकर हैरान है। जबकि उसका कोई मतलब नहीं है। मेडिकल स्टोर का मालिक भी नाले पर खोखे लगाकर दुकानदारी करेगा। सूची में तीसरी पीढ़ी तक के लोगों को दावेदार बना दिया गया है।
मेयर मनोज गर्ग का कहना है कि लोगों को रोजगार देने के लिए फिलहाल अस्थायी तौर पर व्यवस्था की जा रही है। स्थायी इंतजाम होते ही यहां से इन्हें हटाकर स्थायी इंतजामों में भेज दिया जाएगा।