नैनीताल हाईकोर्ट की ओर से गंगा को जीवित व्यक्ति का दर्जा दिए जाने के आदेश को राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पर शारदा एवं ज्योर्तिपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। उन्होंने कहा कि गंगा को स्वच्छ करने के खोखले दावों की पोल खुलकर सामने आ गई है। गंगा को स्वच्छ बनाए रखना है तो कड़ा कानून बनाना चाहिए। गंगा पर बने बांध भी समाप्त करने पड़ेे तो इसके लिए भी सरकारों को पहल करनी होगी।
कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में पत्रकारों से बातचीत में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि गंगा मां है और सृष्टि की पालन हार है। गंगा से आस्था के साथ जीवन भी जुड़ा है। सरकार गंगा के जीवित व्यक्ति होने के आदेश के खिलाफ देश के सर्वोच्च न्यायालय में जा रही है। अच्छा होता यदि सरकार गंगा की सफाई के लिए ठोस निर्णय लेती। उन्होंने कहा कि गंगा को व्यवसायिक बनाते हुए कूड़ा डालने का माध्यम बना दिया गया है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी के उस बयान की तारीफ की जिसमें उन्होंने कहा है कि गंगा को स्वच्छ रखने के लिए बांध भी समाप्त करने पड़े तो पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दिए गए आंकड़ों पर कार्य करने को कहा।
जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि गंगा को इस तरह से छोड़ा नहीं जा सकता। यह एक साजिश है ताकि लोग गंगा में नहाना और गंगा जल पीना छोड़ दें। आंकड़े अनुकूल हो या नहीं वे गंगा को नहीं छोड़ सकते हैं और यदि गंगा में प्रदूषण है तो उसे दूर करने का कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि जब गंगा बंद होती है तो सैकड़ों नाले गंगा में गिरते दिखाई देते हैं और वे चाहते है कि यह सब नाले बंद हों। गंगा में हम स्नान करना बंद कर दे, यह व्यवहारिक नहीं है। केंद्र ने गंगा के लिए अलग मंत्रालय बनाया है और ऐसे में इस तरह की रिपोर्ट आई है तो मंत्रालय को और अधिक सतर्क होकर गंगा के लिए कार्य करना चाहिए।