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हाईटेक होने के साथ संस्कारविहीन हो रहे हम

Sat, 28 Nov 2015 11:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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हरिद्वार। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि समाज हाईटेक होने के साथ-साथ संस्कारविहीन होता जा रहा है।  चिकित्सक लोगों के मस्तिष्क ठीक कर धन की लिप्सा हटाएं। जगद्गुरु ने धर्म निरपेक्षता को निरर्थक शब्द बताते हुए कहा कि हमारा देश धर्म सापेक्ष है।
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कनखल स्थित जगद्गुरु आश्रम में सेवा भारती उत्तरांचल की ओर से शनिवार से प्रारंभ हुए दो दिवसीय होम्योपैथिक चिकित्सकों के आरोग्य मित्र प्रशिक्षण शिविर के उद्घाटन सत्र को जगद्गुरु शंकराचार्य ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज लोगों में धन लोलुपता बेतहाशा बढ़ती जा रही है। चिकित्सक जहां रोगों का इलाज करते हैं वहीं उन्हें होम्योपैथी से लोगों के मस्तिष्क ठीक करने चाहिए ताकि धन लिप्सा कम हो सके। कहा कि चिकित्सक को व्यवसायी नहीं मित्र होना चाहिए। महाराज ने कहा कि देश जितनी उन्नति करता जा रहा है, हाईटेक होता जा रहा है लोग उतने ही संस्कारों को भूलते जा रहे हैं। देश का दुनियाभर में जितना सम्मान बढ़ता जा रहा हम उतने ही अशिष्ट होते जा रहे हैं। उन्होंने संस्कारों को बनाए रखने का आह्वान किया। महाराज ने कहा कि संविधान में धर्म निरपेक्ष बेहूदा शब्द है। उन्होंने कहा कि धर्म निरपेक्ष कोई नहीं हो सकता। मनुष्य पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और वायु आदि पांच तत्वों से मिलकर बना है। पांचों तत्वों के अलग अलग धर्म हैं फिर इनसे बना शरीर धर्म निरपेक्ष कैसे हो सकता है। कहा कि भारत धर्म सापेक्ष देश है। संविधान के धर्म निरपेक्ष शब्द की आवश्यक रुप से समीक्षा की जानी चाहिए। शंकराचार्य ने कहा कि गांधी जी ने राम राज्य की कल्पना की थी। राम धर्म का दूसरा नाम है और धर्म के बिना कोई राज्य नहीं चल सकता। कार्यक्रम में रानीपुर विधायक आदेश चौहान ने भी चिकित्सकों को शुभकामनाएं दी। गंगा राम, राकेश बोड़ई, जय किशन, सुनील कुुमार, डा. सुरेंद्र सिंह, डा. आरके मौर्य, डा. शियाराम और संजय शर्मा आदि चिकित्सक और गणमान्य लोग शामिल रहे।
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