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रातभर सोने नहीं देती गंगा की उफनती लहरें

Mon, 29 Jun 2015 01:02 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/रुड़की
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बरसात का मौसम आते ही गंगदासपुर के ग्रामीणों की धड़कनें तेज होने लगी हैं। बरसात में लगभग हर साल ही अपना सबकुछ गवां देने से आजिज आ चुके ग्रामीण अब भगवान से इन दुश्वारियों से निजात दिलाने की गुहार लगा रहे हैं।
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करीब 1100 लोगों की आबादी वाले गंगदासपुर में अधिकांश किसान रहते हैं।

बाढ़ इस गांव की सबसे बड़ी समस्या ़है। लगभग हर साल बाढ़ यहां कहर बरपाती है। इस त्रासदी ने यहां के लोगों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। 16 जून 2013 को केदारघाटी में आई जलप्रलय के बाद उफनाई गंगा का जलस्तर बढने पर सोपरी गांव के पास 19 जून को गंगा का तटबंध टूट जाने से इस गांव में पानी भर गया था।

जिसमें लोगों घरों में रखा सारा सामान बाढ़ के पानी के साथ बह गया था। खेतों में खड़ी सारी फ सलें नष्ट हो गई थी। खेतों में पानी भर होने के कारण सन् 2014 तक खेतों में कोई फसल नहीं उग पाई थी। अब किसानों ने अपने कुछ खेतों को सही कर उनमें कड़ी मेहनत कर फसल तो उगा ली लेकिन बरसात शुरू होते ही किसानों के चेहरों पर फिर चिंता की लकीरें दिखाई देने लगी हैं।
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गांव की बुजुर्ग महिला लाजवंती, रिसाली देवी, मीना, श्यामसिंह, धर्मपाल, ओमप्रकाश, रोढ़ा सिंह आदि का कहना है कि  बाढ़ ने हमें पूरी तरह से तबाह करके रख दिया है। दो साल बाद कड़ी मेहनत कर खेतों में गन्ना और धान की फसल की बुआई की थी लेकिन लगता है कि बाढ़ इस बार भी हमें बर्बाद करके छोड़ेगी।

इनका कहना है कि बार-बार फसल तबाह होना, गांव छोड़कर बाहर जाने से पूरी तरह तंग आ चुके हैं। सरकार और प्रशासन के रवैये से भी ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। उनका आरोप है कि नेताओं और अफसरों ने दावे तो बहुत किए लेकिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के रहने वालों के लिए धरातल पर कुछ नहीं किया जा रहा है।
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